Jhiram Ghati----छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में 13 साल बाद अदालत का बड़ा फैसला आया है। जगदलपुर की NIA कोर्ट ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। 25 मई 2013 को हुए इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत 32 लोगों की इस हमले में जान गई थी। अब फैसले के बाद मामले की कानूनी लड़ाई का अगला चरण शुरू होगा।
झीरम घाटी केस में 10 आरोपी दोषी करार
5 सितंबर को जगदलपुर स्थित NIA कोर्ट ने झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया। इस केस में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चली थी, लेकिन एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 101 गवाहों के बयान और दस्तावेज पेश किए थे। 10 अगस्त को मामले में अंतिम बहस पूरी हुई थी, जिसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
एक काफिला और अचानक बरसने लगी गोलियां
25 मई 2013 को सुकमा में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के बाद नेताओं का काफिला जगदलपुर के लिए रवाना हुआ था। करीब 25 गाड़ियों में लगभग 200 नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे। दोपहर करीब 3:40 बजे काफिला झीरम घाटी पहुंचा। इसी दौरान नक्सलियों ने पेड़ गिराकर रास्ता बंद कर दिया। गाड़ियां रुकते ही 200 से ज्यादा नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। करीब डेढ़ घंटे तक इलाके में गोलियों की आवाज गूंजती रही।
नंदकुमार पटेल से महेंद्र कर्मा तक, कई बड़े चेहरे निशाने पर
हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल की मौके पर ही मौत हो गई। काफिले में महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार और मलकीत सिंह गैदू समेत कांग्रेस के कई प्रमुख नेता भी मौजूद थे। शाम करीब 5:30 बजे नक्सली पहाड़ों से नीचे आए और गाड़ियों की तलाशी लेने लगे। इसी दौरान उन्हें महेंद्र कर्मा मिले। सलवा जुडूम आंदोलन से जुड़े होने के कारण नक्सली उन्हें अपना बड़ा विरोधी मानते थे और उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई।
फैसले के बाद भी जांच को लेकर उठते रहे सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने झीरम मामले की जांच को लेकर कई बार सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि हमले के पीछे के षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने के लिए जांच में ठोस प्रयास नहीं किए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि दरभा थाने की FIR में नामजद लोगों से पूछताछ नहीं हुई और गुडसा उसेंडी का बयान भी नहीं लिया गया। बघेल ने मुख्यमंत्री रहते हुए केंद्र से जांच राज्य सरकार को सौंपने की मांग किए जाने की बात भी कही थी।
दोषी करार आरोपियों की ओर से हाईकोर्ट जाने की तैयारी
अदालत के फैसले के बाद बचाव पक्ष ने असंतोष जताया है। 10 आरोपियों की पैरवी कर रहे वकील अरविंद चौधरी ने कहा कि वे फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और इसके खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे। यानी 13 साल पुराने इस मामले में NIA कोर्ट का फैसला आने के बाद अब कानूनी लड़ाई का अगला पड़ाव हाईकोर्ट हो सकता है। झीरम घाटी हमला आज भी छत्तीसगढ़ के सबसे दर्दनाक राजनीतिक और नक्सली हिंसा के अध्यायों में गिना जाता है।