Jitiya Vrat 2026 Date: संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना से रखा जाने वाला जितिया व्रत इस वर्ष 3 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इसे जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व में माताएं अपनी संतान के मंगल और दीर्घायु की कामना करते हुए कठिन व्रत करती हैं। कई स्थानों पर इस दिन राजा जीमूतवाहन की पूजा और व्रत कथा सुनने की परंपरा है।धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक,जितिया व्रत मातृभक्ति और संतान की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन व्रती महिलाएं पूरे श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना करती हैं और संतान के उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना करती हैं।
जितिया व्रत में क्यों होती है जीमूतवाहन की पूजा?
इस पर्व का संबंध राजा जीमूतवाहन से जुड़ी एक प्रसिद्ध धार्मिक कथा से बताया जाता है। मान्यता है कि जीमूतवाहन ने नागवंश की रक्षा के लिए अपने जीवन का त्याग करने का निर्णय लिया था। उनके त्याग और करुणा की इसी कथा को संतान की सुरक्षा और दीर्घायु की कामना से जोड़ा जाता है।जितिया के दिन महिलाएं पूजा करने के साथ व्रत कथा भी सुनती हैं। धार्मिक परंपरा में कथा श्रवण को इस अनुष्ठान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।
3 अक्टूबर को व्रत, अगले दिन होगा पारण
पंचांग के अनुसार इस वर्ष अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर 2026 को सुबह 9:53 बजे आरंभ होगी और 4 अक्टूबर को सुबह 7:27 बजे तक रहेगी। अष्टमी तिथि के दौरान ही जितिया व्रत रखा जाएगा। अष्टमी समाप्त होने के बाद नवमी तिथि शुरू होगी। इसी आधार पर व्रत का पारण 4 अक्टूबर को सुबह 7:27 बजे के बाद किया जाएगा। व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए तिथि और पारण के समय का विशेष महत्व माना जाता है।
पूजा की थाली में शामिल होंगी ये सामग्री
जितिया की पूजा में कुछ पारंपरिक वस्तुओं को विशेष स्थान दिया जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा के लिए कुश, भैंस का दूध, दही, गोरस, महुआ के फल, विभिन्न पत्ते-फूल, ज्वार के दाने और धान का लावा आदि रखे जाते हैं। इसके अलावा पूजा में हल्दी, लाल चंदन, मिट्टी का दीपक और मिट्टी के पात्र का इस्तेमाल किया जाता है। नए वस्त्र, जनेऊ और अलग-अलग प्रकार के अनाज भी पूजा सामग्री का हिस्सा बनाए जाते हैं।
संतान के लिए रखा जाता है कठिन व्रत
जितिया व्रत को माताओं के कठिन व्रतों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार,महिलाएं अपनी संतान की सलामती, अच्छी सेहत और लंबी उम्र की प्रार्थना के साथ यह व्रत करती हैं। इस पर्व में केवल व्रत रखना ही महत्वपूर्ण नहीं माना जाता, बल्कि पूजा-पाठ, जीमूतवाहन की कथा का श्रवण और संतान के कल्याण की कामना भी परंपरा का हिस्सा है। यही वजह है कि जितिया व्रत कई परिवारों में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।