
JMM big decision: बिहार विधानसभा चुनाव से जुड़ी बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने ऐलान किया है कि वह अब बिहार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगी। यह घोषणा उस समय आई है जब पार्टी ने कुछ दिन पहले ही छह सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कही थी। झामुमो का यह फैसला बिहार की सियासत में नया मोड़ लाने वाला माना जा रहा है।
सीट बंटवारे को लेकर नाराजगी
सूत्रों के मुताबिक, झामुमो ने यह कदम राजद और कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे पर विवाद के चलते उठाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि उन्हें चुनाव से दूर रखने की साजिश की गई। झामुमो के नेताओं ने कांग्रेस और राजद पर राजनीतिक भेदभाव और साजिश का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव में पार्टी को किनारे किया गया, जिसके बाद अब गठबंधन की समीक्षा की जाएगी। इससे पहले झामुमो ने चकाई, धमदाहा, कटोरिया, मनिहारी, जमुई और पीरपैंती सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था।
झारखंड की राजनीति पर पड़ेगा असर
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि झामुमो का यह निर्णय सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि झारखंड की सियासत पर भी असर डाल सकता है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह फैसला “सम्मान और सिद्धांत” के आधार पर लिया गया है। झामुमो ने साफ किया है कि वह अपने संगठन और विचारधारा को कमजोर नहीं होने देगी।
बता दें कि बिहार विधानसभा की 243 सीटों पर दो चरणों में मतदान होगा—पहला 6 नवंबर और दूसरा 11 नवंबर को, जबकि नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। झामुमो का चुनाव मैदान से हटना अब कई सीटों पर मुकाबले का समीकरण बदल सकता है।