उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे से देश की राजनीति में हड़कंप मच गया है। विपक्ष ने इस इस्तीफे को सिर्फ स्वास्थ्य कारणों से जोड़ने से इनकार किया है और इसमें सत्ता पक्ष की 'अनुपस्थिति' को अहम वजह बताया है। खासकर जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू का बीएसी बैठक में शामिल न होना चर्चा में रहा। अब इस पूरे मामले में खुद भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बयान देकर उन तमाम अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की है, जिनसे उपराष्ट्रपति का इस्तीफा जोड़कर देखा जा रहा था।
क्या सच में सेहत ही कारण थी?
धनखड़ के इस्तीफे पर विपक्ष को संदेह धनखड़ ने इस्तीफे में स्वास्थ्य का हवाला दिया, लेकिन कांग्रेस को इस पर संदेह है। जयराम रमेश समेत कई नेताओं ने आरोप लगाया कि 21 जुलाई को दोपहर से शाम के बीच कुछ ऐसा हुआ, जिसके कारण नड्डा और रिजिजू बीएसी की दूसरी बैठक में शामिल नहीं हुए और धनखड़ ने इससे आहत होकर इस्तीफा दे दिया।
जेपी नड्डा ने क्यों नहीं की बैठक में शिरकत?
खुद नड्डा ने बताई वजह ,जेपी नड्डा ने स्पष्ट किया कि वह और रिजिजू 4:30 बजे की बैठक में इसलिए नहीं पहुंच पाए क्योंकि वे अन्य महत्वपूर्ण संसदीय कार्यों में व्यस्त थे। उन्होंने यह भी बताया कि उपराष्ट्रपति कार्यालय को इसकी पूर्व सूचना पहले ही दे दी गई थी।
रिकॉर्ड वाली टिप्पणी पर भी दी सफाई ,‘वो चेयर के लिए नहीं था’—नड्डा
नड्डा ने कहा कि राज्यसभा में जो बयान दिया कि "आप जो बोल रहे हैं वो रिकॉर्ड में नहीं जाएगा", वो विपक्ष के टोका-टोकी करने वाले सांसदों के लिए था, न कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के लिए। उन्होंने इसे तोड़-मरोड़ कर पेश करने के आरोपों को खारिज किया।
धनखड़ का कार्यकाल और विवाद,विपक्ष से तीखी टक्कर और महाभियोग प्रस्ताव
धनखड़ का कार्यकाल कई बार विपक्ष से टकरावों से भरा रहा। उनके खिलाफ राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव भी पेश किया गया था, जो बाद में खारिज कर दिया गया। वह वीवी गिरि और आर वेंकटरमन के बाद कार्यकाल के दौरान इस्तीफा देने वाले तीसरे उपराष्ट्रपति हैं।
अब आगे क्या? 60 दिनों में होगा चुनाव, नए नामों पर चर्चा शुरू
संविधान के मुताबिक, 60 दिनों के भीतर नए उपराष्ट्रपति का चुनाव कराया जाएगा। एनडीए के पास बहुमत होने के कारण उसकी भूमिका अहम मानी जा रही है। अब सत्तारूढ़ दल संभावित नामों पर मंथन कर रहा है।