केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, प्रमुख स्वास्थ्य कार्यक्रमों के कार्यान्वयन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (एबी पीएम-जेएवाई) और अन्य प्रमुख योजनाओं के तहत निधियों के प्रभावी उपयोग पर चर्चा हुई।
दवाओं और निदान उपकरणों की उपलब्धता
स्वास्थ्य अवसंरचना में सुधार, टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पहलों, टीबी और अन्य वेक्टर जनित रोगों के उन्मूलन, गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की शीघ्र जांच और निदान तथा सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर दवाओं और निदान उपकरणों की उपलब्धता के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने पर चर्चा की गई।
सेवाओं को सुनिश्चित करने पर जोर
निधियों के समयबद्ध उपयोग, स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणालियों को सुदृढ़ करने, बेहतर कार्यक्रम निगरानी और राज्य भर में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल 3505.59 करोड़ रुपए का संसाधन आवंटन राज्य को सूचित किया गया, जिसमें से 527.58 करोड़ रुपए की पहली स्वीकृत राशि आज राज्य को जारी कर दी गई है। राज्य को यह भी सूचित किया गया कि प्रधानमंत्री-अभिमान और 15वें वित्त आयोग-स्वास्थ्य अनुदान के लिए राज्य के पास उपलब्ध निधियों का शीघ्र उपयोग किया जाए।
स्वास्थ्य समाधानों को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया
बैठक में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को बेहतर नियामक निगरानी, निदान और आपूर्ति श्रृंखला प्रणालियों को मजबूत करने और प्रौद्योगिकी-आधारित स्वास्थ्य समाधानों को बढ़ावा देने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। राज्य में लागू होने वाले टीबी मुक्त भारत अभियान को गति देने पर विशेष बल दिया गया, जिसके तहत गहन स्क्रीनिंग, उपचार अनुपालन और जिला स्तरीय निगरानी को प्राथमिकता दी जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने राज्य में जल्द से जल्द एचपीवी टीकाकरण शुरू करने का भी उल्लेख किया।
जन स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने बैठक को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (यू5एमआर) और नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) जैसे प्रमुख जन स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार और उन्हें बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों और उनसे जुड़ी जन स्वास्थ्य संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए।