Jharkhand JPSC Supreme Court Exam Controversy----झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC की 2025 प्रारंभिक परीक्षा को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर हरिशरण देवगन ने याचिका दाखिल की है। याचिका में परीक्षा को रद्द कर नए सिरे से आयोजित कराने के साथ पूरे मामले की CBI जांच की मांग की गई है। इसके अलावा जांच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की स्वतंत्र कमेटी बनाने और परीक्षा से जुड़े सभी जरूरी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है।
वायरल OMR कॉपी से शुरू हुआ विवाद
JPSC की 2025 प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी के आरोप उस समय सामने आए, जब 2 जुलाई को एक सफल अभ्यर्थी की OMR कार्बन कॉपी वायरल हुई। आरोप लगाया गया कि पेपर-1 में सिर्फ 48 सवाल हल करने के बावजूद संबंधित अभ्यर्थी को आगे की परीक्षा के लिए योग्य घोषित किया गया। OMR कॉपी सामने आने के बाद छात्रों ने परीक्षा की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और विरोध शुरू कर दिया।
जांच CID को सौंपी गई, छात्र संतुष्ट नहीं
मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इसकी जांच CID को सौंप दी। हालांकि छात्रों की नाराजगी खत्म नहीं हुई। दिए गए इनपुट के मुताबिक छात्र 25 जुलाई से रांची में आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से जांच हो। इसी बीच अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका के जरिए मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग
याचिका वकील सत्यम सिंह राजपूत के जरिए दाखिल की गई है। इसमें JPSC प्रारंभिक परीक्षा-2025 को रद्द करने और सुरक्षा उपायों के साथ दोबारा परीक्षा कराने की मांग रखी गई है। याचिकाकर्ता ने अनियमितताओं की विस्तृत और समयबद्ध CBI जांच कराने की मांग भी की है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त जज या झारखंड से बाहर के किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच कमेटी गठित करने की मांग की गई है।
OMR, CCTV और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
याचिका में परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई अहम रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की गई है। इसमें मूल OMR शीट, कार्बन कॉपी, प्रश्नपत्र, आंसर-की, अटेंडेंस और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड शामिल हैं। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों के CCTV फुटेज, डिस्पैच रजिस्टर और स्कैनिंग रिकॉर्ड को भी सुरक्षित रखने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने की बात भी रखी है। साथ ही यह जांचने की मांग की गई है कि अनियमितता में शामिल अभ्यर्थियों और निर्दोष अभ्यर्थियों की अलग-अलग पहचान संभव है या नहीं।