साल 2002 में लखनऊ के वरिष्ठ वकील इंद्र देव सिंह की हत्या के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। <html>
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<!--StartFragment-->इंद्र देव सिंह हत्याकांड में आखिरकार अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी है। इंद्र देव सिंह लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पिता थे। अदालत ने तीनों दोषियों पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
24 साल बाद आया बड़ा फैसला
करीब 24 साल पुराने चर्चित इंद्र देव सिंह हत्याकांड में आखिरकार अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी है। इंद्र देव सिंह लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पिता थे। अदालत ने तीनों दोषियों पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
अदालत से लौटते समय हुई थी हत्या
8 अगस्त 2002 को इंद्र देव सिंह अदालत से स्कूटर पर घर लौट रहे थे। इसी दौरान जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के पास बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी थी। घटना के बाद उनकी पत्नी नयनतारा ने पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
जांच में सामने आई पूरी साजिश
सीबीआई की जांच में पता चला कि विक्रम यादव उर्फ कालिया ने गोली चलाई थी, जबकि ब्रजेश कुमार यादव हमले में इस्तेमाल किए गए स्कूटर पर उसके साथ था। जांच के आधार पर विक्रम यादव, पन्ना सिंह और ब्रजेश कुमार यादव के खिलाफ हत्या और साजिश का मामला चलाया गया। अदालत ने 30 जून को तीनों को दोषी माना था और अब उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई है।
तीन आरोपियों की हो चुकी है मौत
इस मामले में कुल छह लोगों के नाम सामने आए थे। लेकिन मुकदमे की सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मौत हो गई। वहीं शुरुआती एफआईआर में जिन तीन अन्य लोगों के नाम थे, उनके खिलाफ जांच में कोई सबूत नहीं मिला, इसलिए उन्हें आरोपों से बाहर कर दिया गया।
जमानत रद्द कर भेजा गया जेल
विक्रम यादव पहले से जेल में बंद था। जबकि पन्ना सिंह और ब्रजेश कुमार यादव जमानत पर बाहर थे। अदालत ने दोषी ठहराने के बाद दोनों की जमानत रद्द कर दी और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद अदालत ने सजा का ऐलान किया।
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिला इंसाफ
करीब ढाई दशक तक चली सुनवाई के बाद अब इस बहुचर्चित मामले में फैसला आया है। अदालत के इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद मिला इंसाफ माना जा रहा है। सीबीआई की जांच और अदालत में पेश किए गए सबूतों के आधार पर तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।