भारत को नया मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। जस्टिस सूर्यकांत ने देश के 53वें CJI के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में प्रधानमंत्री सहित कई उच्च पदस्थ गणमान्य मौजूद रहे। जस्टिस सूर्यकांत अब 15 महीने तक देश की सर्वोच्च न्यायपालिका का नेतृत्व संभालेंगे। उन्होंने पूर्व CJI के स्थान पर यह जिम्मेदारी ग्रहण की।
शपथ ग्रहण समारोह में दिखा गरिमा का वातावरण
राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में जस्टिस सूर्यकांत ने औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री, मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्य, कई पूर्व जज और अन्य गणमान्य उपस्थित रहे। पूरे समारोह में संवैधानिक गरिमा स्पष्ट रूप से नजर आई।
15 महीनों तक संभालेंगे जिम्मेदारी
नए CJI का कार्यकाल 15 महीनों का होगा। वह इस दौरान शीर्ष अदालत के प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों का संचालन करेंगे। उनसे यह उम्मीद जताई जा रही है कि वह लंबित मामलों की संख्या कम करने और न्यायिक प्रणाली में सुधारों को गति देंगे।
साधारण परिवार से सुप्रीम कोर्ट तक की यात्रा
जस्टिस सूर्यकांत का जन्म हरियाणा के एक सामान्य परिवार में हुआ था। उन्होंने 1984 में हिसार से अपने कानूनी करियर की शुरुआत की। धीरे-धीरे उन्होंने संवैधानिक, सेवा और सिविल मामलों में मजबूत पहचान बनाई और विभिन्न संस्थानों की ओर से महत्वपूर्ण मामलों में पक्ष रखा।
सबसे कम उम्र के एडवोकेट जनरल रहेवर्ष 2000 में उन्हें हरियाणा का सबसे युवा एडवोकेट जनरल बनाया गया। इसके बाद वे सीनियर एडवोकेट बने और 2004 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के जज के रूप में नियुक्त हुए। उनकी न्यायिक समझ और कार्यशैली को हमेशा सराहना मिली।
हिमाचल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से सुप्रीम कोर्ट तक
2018 में जस्टिस सूर्यकांत ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला। 2019 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त किया गया। नवंबर 2024 से वे सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन भी रहे। अब देश के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनसे बड़े बदलावों की उम्मीद है।