साल 2025 के खत्म होने से पहले पंचांग एक बड़ी चेतावनी दे रहा है। 20 दिसंबर को एक ऐसा अशुभ संयोग बन रहा है, जिसे ज्योतिष में ज्वालामुखी योग कहा गया है। मान्यता है कि इस योग में किए गए शुभ कार्य फल देने के बजाय उल्टा प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे में दिनभर सतर्कता और संयम जरूरी है। आइए जानते हैं यह योग कब बन रहा है, क्यों अशुभ माना जाता है और किन कार्यों से बचना confirmed है।
क्या है ज्वालामुखी योग?
जैसे ज्वालामुखी के फटने से आसपास तबाही मचती है, वैसे ही यह योग भी जीवन में अवरोध, तनाव और नुकसान का संकेत माना जाता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, जब प्रतिपदा तिथि, मूल नक्षत्र और धनु राशि एक साथ आती हैं, तब ज्वालामुखी योग का निर्माण होता है। यह योग सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है।
ज्वालामुखी योग का समय
दृक पंचांग के अनुसार,
20 दिसंबर 2025 (शनिवार) को
योग की शुरुआत: सुबह 7:12 बजे
योग की समाप्ति: रात 1:21 बजे (21 दिसंबर)
इस तरह यह योग लगभग पूरे दिन प्रभावी रहेगा। सूर्योदय के कुछ मिनट बाद ही यह अशुभ संयोग सक्रिय हो जाएगा।
क्यों बन रहा है यह योग 20 दिसंबर को?
इस दिन पौष शुक्ल प्रतिपदा तिथि पूरे दिन रहेगी। साथ ही मूल नक्षत्र सुबह से देर रात तक प्रभावी रहेगा। खास बात यह है कि सूर्य और चंद्रमा दोनों धनु राशि में स्थित होंगे। इन तीनों ग्रह-स्थितियों के मेल से ज्वालामुखी योग का निर्माण हो रहा है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत अशुभ माना गया है।
ज्वालामुखी योग में भूलकर भी न करें ये 5 काम
1. विवाह या सगाई – यह नवदंपत्ति के दांपत्य जीवन पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
2. गृह प्रवेश – नए घर में प्रवेश से पारिवारिक अशांति की आशंका मानी जाती है।
3. नया काम या जॉब जॉइन – व्यापार, दुकान उद्घाटन या नई नौकरी शुरू करने से बचें।
4. शुभ संस्कार – मुंडन, उपनयन, गर्भाधान जैसे संस्कार वर्जित माने गए हैं।
5. खरीदारी और निवेश – जमीन, मकान, वाहन या फ्लैट की खरीद इस दिन न करें।
क्या करें इस दिन?
ज्योतिषाचार्य सलाह देते हैं कि इस दिन धैर्य, साधना और आत्मसंयम अपनाएं। हनुमान चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र या अपने इष्ट देव का ध्यान करना शुभ माना जाता है। बड़े फैसलों को अगले दिन के लिए टालना ही समझदारी होगी।