Kalawa Bandhne Ke Niyam: सनातन धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य, पूजा-अनुष्ठान या हवन के समय हाथ में कलावा बांधने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसे मौली और रक्षासूत्र के नाम से भी जाना जाता है। पूजा के दौरान माथे पर तिलक लगाने के साथ कलाई पर कलावा बांधना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यह पवित्र धागा देवी-देवताओं के आशीर्वाद और रक्षा का प्रतीक होता है। हालांकि, कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि पूजा में बांधा गया कलावा आखिर कितने दिनों तक पहनना चाहिए और पुराना होने पर इसे किस तरह उतारना उचित है। आइए जानते हैं इससे जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं के बारे में।
कलावा बांधने का क्या है धार्मिक महत्व?
हिंदू धार्मिक परंपराओं में कलावे को विशेष स्थान दिया गया है। मान्यता है कि कलाई पर बांधा जाने वाला यह धागा ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक होता है। पूजा के दौरान इसे बांधते समय व्यक्ति के कल्याण और मंगल की कामना की जाती है। कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलावा पहनने से नकारात्मक शक्तियों और बुरी नजर से रक्षा होती है। यही वजह है कि विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञ और अन्य शुभ अवसरों पर रक्षासूत्र बांधने की परंपरा निभाई जाती है।
पुरुषों और महिलाओं को किस हाथ में बांधना चाहिए कलावा?
कलावा बांधने को लेकर धार्मिक परंपराओं में कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इनका पालन थोड़ा भिन्न हो सकता है।
पुरुष: परंपरागत रूप से पुरुषों की दाहिनी कलाई पर मौली बांधी जाती है।
अविवाहित महिलाएं: कई धार्मिक परंपराओं में कुंवारी कन्याओं को दाएं हाथ में कलावा बांधने की सलाह दी जाती है।
विवाहित महिलाएं: शादीशुदा महिलाओं के बाएं हाथ में रक्षासूत्र बांधने की परंपरा प्रचलित है।
धार्मिक मान्यताओं में पत्नी को पति की वामांगिनी कहा जाता है। वामांगिनी का अर्थ बाईं ओर स्थान पाने वाली होता है। इसी मान्यता के आधार पर सुहागिन महिलाओं के बाएं हाथ में मौली बांधना शुभ समझा जाता है। कलावा बांधते समय धागे को कलाई पर तीन, पांच या सात बार लपेटने की भी परंपरा है।
कितने दिनों तक पहन सकते हैं कलावा?
अक्सर लोग पूजा में बंधे कलावे को कई महीनों तक कलाई पर बांधे रखते हैं। हालांकि, कुछ धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, मौली को लगभग 21 दिनों के बाद बदल देना उचित माना जाता है। यदि धागा इससे पहले ही कमजोर हो जाए, उसका रंग उतरने लगे या वह ढीला पड़ जाए, तो उसे पहले भी उतारा जा सकता है। कलावा बदलने के लिए हर स्थिति में 21 दिन पूरे होने का इंतजार करना जरूरी नहीं है।
किस दिन उतारना चाहिए पुराना कलावा?
प्रचलित धार्मिक मान्यताओं में मंगलवार और शनिवार को पुराना रक्षासूत्र खोलने के लिए उपयुक्त माना गया है। हालांकि, इस संबंध में अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों की अपनी परंपराएं हो सकती हैं। कलावा उतारने के बाद उसे सामान्य कचरे में फेंकने के बजाय पूजा की पुरानी सामग्री के साथ अलग रख सकते हैं। इसके बाद स्थानीय परंपरा के अनुसार उसका उचित निस्तारण किया जा सकता है।कुछ लोग पुराने कलावे को पीपल के वृक्ष के नीचे भी रखते हैं। हालांकि, पर्यावरण और स्वच्छता का ध्यान रखते हुए धागे को खुले में छोड़ने से बचना बेहतर है।
पुराना कलावा उतारने के बाद क्या करें?
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यदि कलाई पर बंधा रक्षासूत्र खराब हो गया है, तो उसे सम्मानपूर्वक खोलकर नया कलावा बांधा जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नया रक्षासूत्र पहनते समय भगवान का स्मरण करना और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करना शुभ होता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।