Kali Chaudas Hanuman Puja: दीपावली से ठीक एक दिन पहले मनाई जाने वाली काली चौदस का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन मां काली की आराधना के साथ बजरंगबली की पूजा करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि काली चौदस पर हनुमान जी की उपासना करने से भय, नकारात्मकता और जीवन की बाधाओं से छुटकारा मिलता है। लेकिन आखिर इस दिन हनुमान जी की पूजा क्यों की जाती है? इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं और धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। आइए जानते हैं।
काली चौदस पर हनुमान जी की पूजा का क्या है महत्व?
पंचांग के अनुसार, 7 नवंबर 2026, शनिवार को काली चौदस मनाई जा रही है। इस दिन मां काली की पूजा के साथ हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए विशेष आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में इस परंपरा के पीछे कई रोचक प्रसंग बताए गए हैं।
1.सूर्य को फल समझकर निगलने की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के मुताबिक, बचपन में हनुमान जी ने आकाश में चमकते सूर्य को पका हुआ फल समझ लिया था। उसे खाने के लिए उन्होंने सूर्य को अपने मुंह में रख लिया। इससे पूरी सृष्टि में अंधकार छा गया। तब देवराज इंद्र ने अपने वज्र से हनुमान जी की ठोड़ी पर प्रहार किया, जिसके कारण वे अचेत हो गए। अपने पुत्र की यह दशा देखकर पवन देव अत्यंत दुखी हुए और उन्होंने संसार में वायु का संचार रोक दिया। इससे सभी प्राणी संकट में पड़ गए। इसके बाद ब्रह्मा जी सहित अन्य देवताओं ने हनुमान जी को दिव्य शक्तियों, लंबी आयु और विशेष वरदानों से संपन्न किया। एक मान्यता इस घटना को काली चौदस से जोड़ती है। इसी वजह से इस दिन बजरंगबली की पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है।
2.भगवान श्रीराम ने दिया था विशेष वरदान
एक अन्य धार्मिक मान्यता के अनुसार, 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद जब भगवान श्रीराम माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे, तो पूरी नगरी में उत्सव मनाया गया। उनके स्वागत में लोगों ने दीप जलाकर दीपावली मनाई। कहा जाता है कि इस अवसर पर प्रभु श्रीराम ने हनुमान जी को विशेष आशीर्वाद दिया था। मान्यता है कि दीपावली से एक दिन पहले बजरंगबली की आराधना की जाएगी। तभी से काली चौदस पर हनुमान जी की पूजा करने की परंपरा प्रचलित हुई।
3.नकारात्मक ऊर्जा और भय से रक्षा की मान्यता
धार्मिक विश्वास के अनुसार, काली चौदस की रात तंत्र-मंत्र और नकारात्मक शक्तियों से जुड़ी साधनाओं के लिए विशेष मानी जाती है। हनुमान जी को संकटों का नाश करने वाला और भक्तों की रक्षा करने वाला देवता माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से उनकी उपासना करने पर व्यक्ति को भय, नकारात्मक विचारों और बाधाओं से लड़ने की शक्ति मिलती है। यही वजह है कि काली चौदस पर बजरंगबली को सिंदूर, चमेली का तेल और बूंदी का भोग अर्पित करने का विशेष विधान बताया गया है। कुछ परंपराओं में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हनुमान जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है।
काली चौदस पर इस विधि से करें हनुमान जी की पूजा
इस दिन बजरंगबली का आशीर्वाद पाने के लिए घर पर भी विधि-विधान से पूजा की जा सकती है। पूजा के लिए सुबह या अपनी परंपरा के अनुसार शुभ समय में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके लकड़ी की चौकी पर .लाल कपड़ा बिछाएं और हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें।
.पूजा करते समय अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
.हनुमान जी के साथ भगवान श्रीराम या राम दरबार की तस्वीर भी स्थापित कर सकते हैं।
.बजरंगबली के सामने चमेली के तेल या शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
.उन्हें लाल सिंदूर, चमेली का तेल, अक्षत और लाल या गुलाबी फूल अर्पित करें।
.प्रसाद के रूप में बूंदी के लड्डू, गुड़-चना या घी से बना चूरमा चढ़ाएं।
.इसके बाद श्रद्धापूर्वक 7, 11 या 21 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।
.आखिर में हनुमान जी की आरती करें और परिवार की सुख-शांति एवं मंगल की कामना करें।
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धार्मिक मान्यता है कि काली चौदस पर श्रद्धा और भक्ति के साथ हनुमान जी का स्मरण करने से जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मकता बनी रहती है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।