मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कालनेमी वाले बयान ने माघ मेला विवाद को और गहरा कर दिया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अब देश की जनता समझ चुकी है कि कालनेमी कौन है। शंकराचार्य का कहना है कि वह किसी तरह का सुख नहीं भोग रहे जबकि मुख्यमंत्री राजगद्दी पर बैठे हैं। यह पूरा विवाद अब सिर्फ स्नान तक सीमित नहीं रहा बल्कि असली और नकली संत तथा सनातन धर्म तक पहुंच गया है।
मेरे साथ अपराध हुआ, संज्ञान लें
शंकराचार्य ने साफ शब्दों में कहा कि उनके साथ अपराध हुआ है और उसका संज्ञान लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें जो नोटिस दिया गया उसके पीछे दुर्भावना साफ दिखाई देती है। उनका आरोप है कि अधिकारी मुख्यमंत्री को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपराध को सुधारने की बजाय सिर्फ बयान दिए जा रहे हैं। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि 12 साल से सत्ता में रहते हुए भी गौ हत्या नहीं रोकी जा सकी, इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।
मेला प्रशासन के रवैये पर नाराजगी
माघ मेला प्रशासन के रवैये पर भी शंकराचार्य ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वह पिछले 40 साल से माघ मेले में आते रहे हैं। पहले शिविर दिया जाता था लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि फुटपाथ पर बैठने को मजबूर किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन चाहे तो शिविर उखाड़कर फेंक दे, उन्हें उससे फर्क नहीं पड़ता। शंकराचार्य ने साफ कहा कि केवल कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर देने से वह संतुष्ट नहीं होंगे।
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नोटिस से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान शुरू हुआ। शंकराचार्य की पालकी को रोक दिया गया और बाद में उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया। इसके बाद मेला प्रशासन ने नोटिस चिपकाया और दूसरा नोटिस भेजकर बैरियर तोड़ने और भीड़ में बग्घी घुसाने के आरोप लगाए। नोटिस में यह भी पूछा गया कि क्यों न उन्हें हमेशा के लिए माघ मेले से बाहर कर दिया जाए।
योगी के बयान से बढ़ी सियासी गर्मी
इस विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत और धर्म को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि संत की कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती और धर्म ही उसका स्वाभिमान होता है। उन्होंने कालनेमी शब्द का इस्तेमाल करते हुए सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश की बात कही थी। इसी बयान को लेकर शंकराचार्य ने आपत्ति जताई और इसे सीधे तौर पर अपने खिलाफ बताया।
केशव मौर्य की अपील और आगे की राह
इस बीच उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य से विवाद समाप्त करने और स्नान करने की प्रार्थना की है। उन्होंने शंकराचार्य के चरणों में प्रणाम करते हुए आग्रह किया कि इस विषय का समापन करें। हालांकि शंकराचार्य अपने रुख पर कायम हैं। ऐसे में सवाल यही है कि क्या यह विवाद सुलझेगा या फिर माघ मेला से निकलकर यह मामला प्रदेश की राजनीति में और बड़ा रूप ले लेगा।