सावन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी न केवल व्रत और उपवास के लिए विशेष मानी जाती है, बल्कि इसकी कथा सुनने और पढ़ने से अनेक यज्ञों के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, जो भक्त इस दिन श्रद्धा से व्रत रखते हुए भगवान विष्णु का पूजन करते हैं और कामिका एकादशी की व्रत कथा का श्रवण करते हैं, उन्हें पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
कामिका एकादशी का महत्व
कामिका एकादशी व्रत का वर्णन ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिलता है। यह दिन भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर यदि कोई भक्त एक तुलसी का पत्ता भी श्रीहरि को अर्पित करता है, तो उसे अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत मन, वाणी और शरीर की शुद्धि के लिए भी अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।
व्रत कथा का सारांश
प्राचीन समय की बात है, एक गाँव में एक क्रोधी और हिंसक स्वभाव का व्यक्ति रहता था। एक दिन उसने अपने पड़ोसी की हत्या कर दी। अपराधबोध के चलते वह साधुओं के पास गया और प्रायश्चित के उपाय पूछे। साधुओं ने उसे कामिका एकादशी का व्रत रखने और कथा सुनने की सलाह दी। उसने पूरे विधि-विधान से व्रत रखा और कथा का श्रवण किया। इसके प्रभाव से उसके सभी पाप नष्ट हो गए और उसे परम शांति प्राप्त हुई।
व्रत करने की विधि
व्रत रखने वाले व्यक्ति को दशमी की रात सात्विक भोजन करके उपवास की तैयारी करनी चाहिए।
एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं।
उन्हें पीले फूल, तुलसी पत्र, फल और पंचामृत अर्पित करें।
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।
कामिका एकादशी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।
अगले दिन द्वादशी को व्रत का पारण करें और ज़रूरतमंदों को अन्न व वस्त्र का दान करें।
जानने योग्य बात
कामिका एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और भगवत्कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर है। जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक यह व्रत करते हैं, उन्हें न केवल सांसारिक सुख की प्राप्ति होती है, बल्कि मोक्ष की ओर भी उनका मार्ग प्रशस्त होता है.