Kamika, Putrada Ekadashi in Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ भगवान विष्णु की भक्ति के लिए भी बेहद खास माना जाता है। चातुर्मास की शुरुआत सावन महीने से होती है और इस दौरान पड़ने वाली सभी एकादशियों का धार्मिक महत्व काफी बढ़ जाता है। मान्यता है कि चातुर्मास में भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। साल 2026 में सावन महीने में दो प्रमुख एकादशी व्रत पड़ेंगे। इनमें पहली कामिका एकादशी 9 अगस्त 2026 को और दूसरी सावन पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। दोनों ही व्रत भगवान विष्णु को समर्पित हैं। पद्म पुराण में भी इन व्रतों के महत्व और लाभों का वर्णन मिलता है। आइए जानते हैं अगस्त में आने वाली कामिका और पुत्रदा एकादशी की तिथि, पूजा शुभ मुहूर्त, व्रत पारण समय और धार्मिक महत्व के बारे में।
कामिका एकादशी 2026 की तिथि और पूजा मुहूर्त
सावन कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। साल 2026 में इसकी तिथि 8 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से शुरू होगी और 9 अगस्त को सुबह 11 बजकर 4 मिनट पर समाप्त होगी।
कामिका एकादशी पूजा समय: सुबह 7:27 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक
व्रत पारण का समय: 10 अगस्त को सुबह 5:47 बजे से सुबह 8:00 बजे तक
कामिका एकादशी का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्माजी ने नारद मुनि को कामिका एकादशी का महत्व बताया था। कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु के साथ तुलसी माता की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा के साथ तुलसी का पूजन करते हैं और भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करते हैं, उन्हें पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। वहीं, इस दिन रात्रि जागरण और दीपदान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। कथा के अनुसार, भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाने से पितरों को भी पुण्य लाभ प्राप्त होता है।
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सावन पुत्रदा एकादशी 2026 की तिथि और शुभ समय
सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। इसे पवित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। साल 2026 में पुत्रदा एकादशी की तिथि 23 अगस्त को सुबह 2 बजे शुरू होगी और 24 अगस्त को सुबह 4 बजकर 18 मिनट पर समाप्त होगी।
पुत्रदा एकादशी पूजा मुहूर्त: सुबह 7:32 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक
व्रत पारण समय: दोपहर 1:41 बजे से शाम 4:16 बजे तक
पुत्रदा एकादशी क्यों मानी जाती है खास?
धार्मिक कथाओं के अनुसार प्राचीन समय में राजा महाजित संतान न होने के कारण काफी दुखी थे। महर्षि लोमेश की सलाह पर उन्होंने पुत्रदा एकादशी का व्रत किया, जिसके फलस्वरूप उन्हें योग्य और तेजस्वी संतान की प्राप्ति हुई। मान्यता है कि संतान सुख की इच्छा रखने वाले दंपति इस व्रत को श्रद्धा और विश्वास के साथ करते हैं। भगवान विष्णु की कृपा से मनोकामनाएं पूरी होने का आशीर्वाद मिलता है।