Kanhaiya Kumar Targets Education System: कांग्रेस नेता और एनएसयूआई के एआईसीसी प्रभारी कन्हैया कुमार ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन सरकार इन मुद्दों पर पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखा रही। कन्हैया ने पाठ्यक्रम की त्रुटियों, परीक्षा प्रबंधन में लापरवाही और बढ़ती बेरोजगारी को देश के भविष्य के लिए चिंता का विषय बताया।
पाठ्यक्रम और परीक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
कन्हैया कुमार ने कहा कि विभिन्न राज्यों में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई चूक सामने आई हैं। उन्होंने दावा किया कि कहीं पाठ्यक्रम में तथ्यात्मक गलतियां देखने को मिलीं तो कहीं परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। उनके अनुसार, ऐसी घटनाएं शिक्षा तंत्र की गुणवत्ता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
पेपर लीक को लेकर सरकार पर निशाना
कांग्रेस नेता ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि NEET, UPSC और अन्य परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कन्हैया ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के कारण छात्रों का भरोसा कमजोर हो रहा है। उन्होंने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त और प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
बेरोजगारी और शिक्षा के व्यवसायीकरण पर चिंता
कन्हैया कुमार ने कहा कि देश में लाखों युवा रोजगार की तलाश में हैं और यह स्थिति विकास की राह में बड़ी चुनौती है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा धीरे-धीरे एक सेवा के बजाय व्यवसाय का रूप लेती जा रही है, जिससे आम परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, शिक्षा सभी के लिए सुलभ और गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए, न कि केवल आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग तक सीमित।
छात्रों के भविष्य को लेकर जताई चिंता
कांग्रेस नेता ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था पर आम लोगों का भरोसा कमजोर पड़ रहा है और इसका सीधा असर छात्रों के मनोबल पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को बेहतर अवसर और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली मिलनी चाहिए। कन्हैया ने सरकार से शिक्षा और रोजगार के मुद्दों को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि देश के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए युवाओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं का सम्मान जरूरी है।