कन्नौज में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में देरी से पहुंचे अधिकारियों ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री असीम अरुण तय समय से पहले ही रोमा स्मारक पहुंच गए थे, लेकिन वहां कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था। करीब 45 मिनट तक इंतजार करने के बाद मंत्री नाराज होकर कार्यक्रम स्थल से वापस लौट गए।
अधिकारियों की लेट एंट्री ने बिगाड़ा माहौल
मंत्री के पहुंचने के बाद भी न तो एसडीएम समय पर पहुंचीं और न ही अन्य अधिकारी मौजूद थे। जब तक आशुतोष मोहन अग्निहोत्री और अन्य प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे, तब तक मंत्री वहां से जा चुके थे। इस पूरे घटनाक्रम से कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह बिगड़ गया और अफसरों के बीच हड़कंप मच गया।
राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश
इस कार्यक्रम में भाजपा के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद थे, जो मंत्री के साथ इंतजार करते रहे। मंत्री के जाने के बाद वे भी कार्यक्रम से निकल गए। इसके बाद अधिकारियों ने औपचारिक रूप से कार्यक्रम पूरा कराया, लेकिन उसमें सिर्फ कर्मचारी और छात्र ही शामिल रहे।
डीएम को लिखा सख्त पत्र
घटना के बाद मंत्री असीम अरुण ने डीएम को एक सख्त पत्र लिखकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में 5:30 बजे बुलाया गया था और वह समय से पहले पहुंच गए थे, लेकिन वहां की व्यवस्था समय और शिष्टाचार के विपरीत रही। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यक्रम की शुरुआत डीएम के आने पर ही होनी थी, लेकिन उनके आने का कोई निश्चित समय नहीं बताया गया।
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प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का दिया उदाहरण
अपने पत्र में मंत्री ने नरेन्द्र मोदी और योगी आदित्यनाथ का उदाहरण देते हुए कहा कि सभी लोक सेवकों को समय की पाबंदी और अनुशासन से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि ऐसी स्थिति उनके लिए असहज थी और उन्हें कार्यक्रम छोड़कर जाना पड़ा।
भविष्य के लिए सख्त संदेश
मंत्री ने अंत में डीएम से अपेक्षा जताई कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही न हो और सभी कार्यक्रम समय पर शुरू हों। उन्होंने दो टूक कहा कि “अनुशासन ही प्रशासन की नींव है” और हर अधिकारी को इसका पालन करना चाहिए। यह मामला अब जिले में प्रशासनिक जवाबदेही और अनुशासन पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।