उत्तर प्रदेश के कानपुर में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) की कुर्सी को लेकर चल रहा विवाद अब कोर्ट तक पहुंच गया है. डॉ. हरिदत्त नेमी जिन्हें पहले निलंबित कर दिया गया था उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट (लखनऊ बेंच) में याचिका दायर की थी. कोर्ट ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को फटकार लगाई है.
क्या है पूरा मामला?
16 जून 2025 को डॉ. हरिदत्त नेमी का कानपुर के जिलाधिकारी (DM) जितेंद्र प्रताप सिंह से विवाद हो गया था. इसके बाद सरकार ने उन्हें सस्पेंड कर दिया. उनकी जगह डॉ. उदय नाथ को कानपुर का नया CMO बना दिया गया. डॉ. नेमी ने इसे चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की.
कोर्ट ने दिया था स्टे ऑर्डर
7 जुलाई 2025 को कोर्ट ने डॉ. नेमी के निलंबन पर रोक लगाते हुए स्टे ऑर्डर दे दिया. इसके बाद डॉ. नेमी 10 जुलाई को फिर से CMO ऑफिस पहुंचे. आरोप है कि वहां ADM राजेश कुमार, ACP अभिषेक पांडे और SHO संतोष शुक्ला ने उन्हें काम पर नहीं लौटने दिया और दुव्यवहार किया. डॉ. नेमी ने कहा कि ये अफसर कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर रहे हैं.
कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस राजीव सिंह की बेंच ने कहा कि सरकारी अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश का मजाक उड़ाया है. कोर्ट ने कहा कि स्टे ऑर्डर के बावजूद डॉ. नेमी को ऑफिस में घुसने से रोका गया, यह कोर्ट की अवमानना है.
कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को चेतावनी दी है कि अगर रिकॉर्ड में किसी तरह की छेड़छाड़ की गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
कोर्ट ने ADM, ACP और SHO के खिलाफ सभी साक्ष्य पेश करने को कहा है और कहा है कि मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी.
सरकार ने आखिरकार मानी बात
सरकार ने कोर्ट के दबाव में आकर 16 जुलाई को डॉ. नेमी को बहाल कर दिया. लेकिन डॉ. नेमी के वकील ने कोर्ट से मांग की है कि जिन अधिकारियों ने आदेश की अवहेलना की उनको सजा दी जाए.
हाई कोर्ट ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए अफसरों की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है. अब देखना होगा कि 28 जुलाई की सुनवाई में कोर्ट क्या कदम उठाता है.