कानपुर देहात की राजनीति इन दिनों एक ही लाइन पर अटकी है मैं सबसे बड़ा बदमाश, मुझसे बड़ा कोई हिस्ट्रीशीटर नहीं,दरअसल बीजेपी सांसद देवेंद्र सिंह भोले का ये बयान इतना भारी पड़ गया है कि इसकी फाइल सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दरबार में पहुंच चुकी है. भाजपा संगठन ने इसे बेहद गंभीर मामला मानते हुए रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष, संगठन मंत्री और सीएम योगी को भेज दी है. पार्टी का मानना है कि जनता के बीच नेता आदर्श बनें, न कि एक-दूसरे के खिलाफ ‘गुंडागर्दी’ वाला इमेज बनाएं. अब सवाल ये है कि योगी आदित्यनाथ, जिनकी पहचान ही सख्त कार्रवाई के लिए है, इस मामले में क्या बड़ा फैसला लेने वाले हैं.
दिशा समिति की बैठक बनी मैदान-ए-जंग
जो बैठक जिले के विकास के लिए होती है, वहां इस बार माहौल गर्मियों की लू की तरह तप गया. जिला दिशा समिति की मीटिंग में सांसद और राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला के पति अनिल शुक्ला वारसी ने सांसद भोले पर आरोपों की बौछार कर दी. यहां तक कि उन्हें ‘गुंडों का चेयरमैन’ तक कह दिया. जवाब में भोले भी पीछे नहीं हटे और ‘सबसे बड़ा हिस्ट्रीशीटर’ वाला बयान ठोक दिया. हंगामा इतना बढ़ा कि डीएम-एसपी को बीच-बचाव करना पड़ा और अफसरों ने हाथापाई रोकने के लिए बैठक ही रद्द करा दी, ये नज़ारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए कि विकास की मीटिंग कब महाभारत बन गई.
पुरानी दुश्मनी फिर जागी
ये विवाद कोई एक दिन का गुस्सा नहीं है। वारसी और भोले की खींचतान कई साल पुरानी है. कुछ महीने पहले प्रतिभा शुक्ला ने भी जिले में कार्यकर्ताओं की अनदेखी को लेकर धरना दिया था, जिसे अंदरखाने सांसद से नाराजगी माना गया. जुलाई में वारसी का एक वीडियो वायरल हुआ था अगर मेरी पत्नी मंत्री न होती तो मैं चुनाव लड़कर भोले को औकात दिखा देता, ये वीडियो फिर से सोशल मीडिया पर घूम रहा है, और जनता से लेकर कार्यकर्ताओं तक, सब इस लड़ाई के पुराने-नए पहलुओं को जोड़ने में लगे हैं. दोनों तरफ के समर्थक भी हैरान हैं कि आरोपों और वीडियो की इस जंग में आखिर सच कौन है.
अब निगाहें सिर्फ योगी पर
अब पूरा मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथ में है. भाजपा के अंदर भी चर्चा है कि सबसे बड़ा बदमाश वाला बयान पार्टी की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाता है, योगी की जीरो टॉलरेंस नीति को देखते हुए ये तय माना जा रहा है कि दोनों नेताओं को बुलाकर कड़ी फटकार या कोई बड़ा निर्णय सामने आ सकता है, कानपुर देहात में बीजेपी कार्यकर्ता से लेकर विपक्षी दल तक की निगाहें योगी के फैसले पर टिक गई हैं. समर्थकों में भी टेंशन है कि किसके खिलाफ एक्शन होगा और किसकी सियासी जमीन हिलेगी