कानपुर में पुलिस और उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग के बीच पैदा हुआ विवाद अब ठंडा पड़ गया है. शुरुआत तब हुई जब आयोग की सदस्य अनीता गुप्ता बर्रा थाने के औचक निरीक्षण पर पहुंचीं. बताया गया कि उन्होंने महिलाओं से जुड़े मामलों के रिकॉर्ड और कार्यप्रणाली में कई खामियां पाईं और थाने को लापरवाही न बरतने की चेतावनी दी. इसके जवाब में कानपुर पुलिस की ओर से एक नोटिस भेजा गया, जिसमें लिखा था कि आयोग के सदस्यों को थाने का सीधे निरीक्षण करने का अधिकार नहीं है और इससे पुलिस के दैनिक कामकाज में व्यवधान पड़ता है. यह नोटिस आते ही मामला सुर्खियों में आ गया और प्रशासनिक टकराव खड़ा हो गया.
नोटिस को बताया गलत और अज्ञानता भरा
नोटिस मिलते ही महिला आयोग सदस्य अनीता गुप्ता ने पुलिस के पत्र पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह नोटिस कानून की जानकारी के अभाव में भेजा गया है और इसे मानसिक रूप से कमजोर और अज्ञानता से भरा कदम बताया. अनीता गुप्ता ने कहा कि पुलिस महिला अपराधों को दबाने की कोशिश कर रही है, इसलिए ऐसा नोटिस जारी किया गया. उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान को भी भेज दी और कार्रवाई की मांग की. उनके बयान के बाद मामला और तूल पकड़ने लगा.
पुलिस आयुक्त ने दिया स्पष्टीकरण
मामला बढ़ता देख पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल सामने आए और पूरे विवाद पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी शिकायत के समाधान के लिए थाने जाना बिल्कुल सामान्य है. ज्वाइंट सीपी द्वारा भेजे गए पत्र में कुछ शब्दों की वजह से गलतफहमी पैदा हो गई. आयुक्त ने बताया कि उन्होंने खुद अनीता गुप्ता और ज्वाइंट सीपी विनोद कुमार दोनों से बात की है और दोनों पक्षों के बीच सभी भ्रम दूर हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था में सहयोग और तालमेल ही महिलाओं की सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी है.
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दोनों पक्षों में सुलह, विवाद खत्म
कानपुर पुलिस आयुक्त की पहल के बाद अब यह टकराव पूरी तरह खत्म हो चुका है. न महिला आयोग को आपत्ति है और न ही पुलिस को. दोनों ने माना कि गलतफहमी की वजह से मामला बढ़ गया था. प्रशासन का कहना है कि आपसी सहयोग से ही महिला अपराधों पर असरदार नियंत्रण संभव होगा. विवाद खत्म होने के बाद अब फोकस इस बात पर है कि शिकायतों का समाधान तेजी से हो और थानों में महिलाओं से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाए. इस पूरे घटनाक्रम ने दिखा दिया कि संवाद से बड़ा कोई समाधान नहीं होता और कानपुर में अब हालात सामान्य हो चुके हैं.