Kanwar Yatra Rules: सावन के आगमन के साथ ही देशभर में कांवड़ यात्रा का सिलसिला भी शुरू हो गया है। हरिद्वार सहित कई पवित्र तीर्थ स्थलों से शिवभक्त गंगाजल लेकर अपने-अपने इलाकों के शिव मंदिरों की ओर रवाना हो रहे हैं। रास्ते में हर तरफ 'बोल बम' और 'हर हर महादेव' के जयकारे सुनाई दे रहे हैं। कांवड़ यात्रा को लेकर शिव भक्तों में खास उत्साह रहता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा के साथ-साथ यात्रा के नियमों और मर्यादाओं का पालन करना भी बेहद जरूरी है। खासकर जो लोग पहली बार कांवड़ लेकर जा रहे हैं, उन्हें कुछ बातों का पहले से ध्यान रखना चाहिए। पंडित आचार्य मदन मोहन के मुताबिक, कांवड़ यात्रा के दौरान संयम और अनुशासन बनाए रखना महत्वपूर्ण माना गया है।
कांवड़ यात्रा कितने प्रकार की होती है?
पंडित आचार्य मदन मोहन के अनुसार कांवड़ यात्रा मुख्य रूप से चार तरह की होती है। इनमें सामान्य कांवड़, डाक कांवड़, खड़ी कांवड़ और दांडी कांवड़ शामिल हैं। सामान्य कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार रास्ते में रुककर आराम कर सकते हैं। वहीं डाक कांवड़ में यात्रा को निर्धारित समय में लगातार आगे बढ़ाने की परंपरा होती है और इसमें बीच में रुकने की अनुमति नहीं मानी जाती। खड़ी कांवड़ में कांवड़ को जमीन पर रखने के बजाय साथी श्रद्धालु उसे संभालकर रखता है। वहीं दांडी कांवड़ को सबसे कठिन यात्राओं में गिना जाता है। इसमें भक्त दंडवत प्रणाम करते हुए धीरे-धीरे शिव मंदिर तक पहुंचते हैं।
पहली बार कांवड़ यात्रा पर जा रहे हैं तो इन बातों का रखें ध्यान
कांवड़ यात्रा शुरू करने से पहले ही खान-पान और दिनचर्या को लेकर संयम बरतना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यात्रा के दौरान मांसाहार, शराब और अन्य तामसिक चीजों से पूरी तरह परहेज किया जाता है। भोजन भी सात्विक रखने की सलाह दी जाती है। यात्रा के दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता का भी ध्यान रखें। स्नान किए बिना कांवड़ को छूने से बचना चाहिए। गंगाजल से भरी कांवड़ को सीधे जमीन पर रखना भी उचित नहीं माना जाता। अगर किसी वजह से उसे कुछ देर के लिए रखना पड़े तो किसी साफ और ऊंचे स्थान का इस्तेमाल करें।
कांवड़ यात्रा में भूलकर भी न करें ये काम
कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी माना जाता है। कांवड़ को पेड़ के नीचे रखने से बचें और उसे किसी के सिर के ऊपर से ले जाने की कोशिश न करें।
यात्रा के दौरान क्रोध, विवाद और अपशब्दों से दूर रहना चाहिए।
किसी दूसरे कांवड़ यात्री या राहगीर के साथ अभद्र व्यवहार न करें।
पूरे रास्ते मन को शांत रखते हुए भगवान शिव का स्मरण और 'बोल बम' का जयघोष करते हुए आगे बढ़ने की परंपरा है।
पंडित आचार्य मदन मोहन के मुताबिक, कांवड़ यात्रा को केवल गंगाजल लाकर शिवलिंग पर चढ़ाने तक सीमित नहीं माना जाता। यह भक्त के संयम, श्रद्धा और अनुशासन की भी परीक्षा होती है।
इसलिए यात्रा के दौरान नियमों का पालन करते हुए शांत मन से भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भक्त पूरी श्रद्धा और मर्यादा के साथ कांवड़ यात्रा पूरी करके शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करता है, उस पर भोलेनाथ की विशेष कृपा बनी रहती है।