सावन का पवित्र महीना शुरू हो चुका है और इसी के साथ शुरू हो रही है कांवड़ यात्रा. मेरठ के सदर बाजार इलाके में इस बार एक खास और अलग तरह की कांवड़ तैयार हो रही है, जिसका नाम रखा गया है –'ऑपरेशन सिंदूर'. यह कांवड़ सिर्फ श्रद्धा और भक्ति की नहीं, बल्कि देशभक्ति और हिंदू-मुस्लिम एकता की भी मिसाल बनेगी. यह पहल न सिर्फ कांवड़ यात्रा की परंपरा को नया रूप दे रही है, बल्कि पूरे देश को यह संदेश दे रही है कि भक्ति, देशभक्ति और भाईचारा ये तीनों साथ-साथ चल सकते हैं.
कांवड़ को मिल रहा है खास रूप
सदर बाजार के रहने वाले गौरव और उनके 20 साथियों ने इस अनोखी कांवड़ को तैयार करने की जिम्मेदारी ली है. खास बात यह है कि इस काम में मुस्लिम समुदाय के युवा भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं और यहां तक कि मस्जिद के इमाम शाहनवाज जमाली भी इस तैयारी में शामिल हैं. उनका कहना है कि "हम अपने देश के साथ हैं।" इस कांवड़ को देशभक्ति से भरपूर लुक दिया जा रहा है. इसमें भारत माता की मूर्ति, राफेल लड़ाकू विमान, आर्मी टैंक और मंदिरों की आकृतियां लगाई जा रही हैं. इस कांवड़ की ऊंचाई 10 फीट और चौड़ाई 12 फीट रखी गई है. इसे देखकर हर किसी को देश की ताकत और एकता की झलक महसूस होगी.
देश के शहीदों को समर्पित ‘ऑपरेशन सिंदूर’
गौरव ने बताया कि यह कांवड़ देश के शहीदों को समर्पित है, खासकर उन लोगों को जो 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले में मारे गए थे. उस दिन 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, जिससे देशभर में आक्रोश फैल गया था. इसके बाद भारतीय सेना ने आतंकवादियों और पाकिस्तान को करारा जवाब दिया. इन्हीं भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस कांवड़ का नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रखा गया है.
15 जुलाई को हरिद्वार रवाना होंगे
गौरव और उनकी टीम 15 जुलाई को हरिद्वार के लिए रवाना होगी और 16 जुलाई को गंगा जल लेकर मेरठ के लिए लौटेगी. यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक कांवड़ यात्रा नहीं, बल्कि देशप्रेम और सौहार्द का संदेश देने वाला अभियान बन चुकी है.
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल
कांवड़ यात्रा को लेकर अक्सर धार्मिक पहचान को लेकर चर्चा होती है, लेकिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ये साबित कर रहा है कि मजहब से ऊपर देश होता है. जब एक ही मंच पर हिंदू और मुस्लिम मिलकर देश के लिए श्रद्धा और सम्मान दिखाते हैं, तो वह अपने आप में एक मजबूत सामाजिक संदेश बन जाता है.