मेरठ। दलित महिला की हत्या और किशोरी के अपहरण की घटना के बाद से कपसाड़ गांव में दिन भर बवाल रहा। सपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस की धक्का-मुक्की हुई। किसी भी अप्रिय घटना को देखते हुए गांव में जाने वाले हर मार्ग पर सिविल पुलिस के साथ पीएसी और आरएएफ तैनात रही। पूरे दिन गांव की महिलाएं और बच्चे छतों से बैठकर गांव में पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं की आवाजाही पर टकटकी लगाए रहे। सभी विपक्षी दलों ने पीड़ित परिवार की 50 लाख की आर्थिक मदद की मांग थी। देर शाम दस लाख का चेक मिलने के बाद पुलिस की कड़ी सुरक्षा में महिला के शव का गांव में अंतिम संस्कार किया गया।
क्या था मामला
सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव निवासी दलित महिला सुनीता की हत्या कर गांव का ही ठाकुर बिरादरी का युवक पारस उनकी नाबालिग बेटी को गुरुवार को अगवा कर ले गया था। इस घटना के विरोध में गांव में जमकर हंगामा हुआ था। परिजनों ने किशोरी को बरामद करने के लिए पुलिस को 48 घंटे का समय दिया था। पुलिस अभी तक ना तो किशोरी को बरामद कर पाई है और ना ही आरोपी हत्थे चढ़ा हैं। शुक्रवार सुबह किशोरी के परिजनों ने पुलिस को अल्टीमेटम दिया था कि जब तक बेटी नहीं मिलेगी, मां का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। डीएम डा.वीपी सिंह व डीआईजी एवं एसएसपी डा. विपिन ताडा ने कई बार महिला के अंतिम प्रयास के लिए परिजनों को मनाने का प्रयास किया था। देर शाम कपसाड़ गांव पहुंचे एडीजी मेरठ जोन भानु भास्कर के आश्वासन पर परिजन महिला के शव के अंतिम संस्कार के लिए माने। इसके बाद एडीएम सिटी बृजेश सिंह ने पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद के लिए दस लाख का चेक दिया। साथ ही लाइसेंस बनवाने और आरोपी पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन मिला। पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में गांव के श्मशान घाट देर शाम महिला अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान गांव में एडीजी भी मौजूद रहे।
गांव सील किया, राजनीति गरमाई
दलित महिला की हत्या कर बेटी को अपहरण करने की घटना के बाद से राजनीति गरमा गई है, जिसको देखते हुए पुलिस ने पूरे गांव को सील कर दिया है और गांव के हर रास्ते पर बैरियर लगाकर सिविल पुलिस के साथ पीएसी व आरएएफ तैनात कर दी। सरधना के सपा विधायक अतुल प्रधान ने पीड़ित परिवार से मिलने का प्रयास किया तो पुलिस ने उनके काफिले को वहीं रोक दिया। विरोध में सपा विधायक गांव के बाहर धरने पर बैठ गए। इसको लेकर सपा कार्यकर्ताओं की पुलिस से तीखी नोकझोंक व धक्का-मुक्की हुई। कमिश्नर चौराहे पर भी सरकार का पुतला जलाने के दौरान सपा कार्यकर्ताओं पुलिस से छीना झपटी और धक्का-मुक्की हुई थी। गांव पहुंचे पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान की पीड़ित परिवार से कहासुनी हुई। विपक्ष के सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने पीड़ित परिवार की 50 लाख रुपये की आर्थिक मदद, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाने की मांग की थी। उधर, डीआईजी एवं एसएसपी डा.विपिन ताडा ने बताया, किशोरी की बरामदगी और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दस विशेष टीमें लगी हैं, जो संभावित स्थानों पर दबिश दे रही है। गांव में कानून व्यवस्था की कोई समस्या नहीं है।