Karnataka by-election drama: कर्नाटक के दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ी अंदरूनी चुनौती का सामना करना पड़ा, जब वरिष्ठ नेता सादिक पहलवान ने बगावती रुख अपनाते हुए निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया। हालात ऐसे बने कि उन्हें मनाने के लिए खुद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को आगे आना पड़ा। आखिरकार बातचीत के बाद मामला सुलझ गया और पार्टी को राहत मिली।
कौन हैं सादिक पहलवान?
सादिक पहलवान कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और खासतौर पर दावणगेरे दक्षिण क्षेत्र की राजनीति में उनका मजबूत प्रभाव है। वे करीब 40 वर्षों से पार्टी से जुड़े रहे हैं और दिवंगत नेता शमनूर शिवशंकरप्पा के करीबी सहयोगी रहे हैं। अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के मुद्दों को लेकर वे लगातार मुखर रहे हैं।
टिकट न मिलने से नाराजगी
उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर सादिक पहलवान ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया था। इससे कांग्रेस के लिए मुश्किल खड़ी हो गई और सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले की आशंका बढ़ गई थी, जिससे पार्टी के वोट बैंक में सेंध लग सकती थी।
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सीएम की पहल से सुलझा मामला
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने खुद पहल करते हुए सादिक पहलवान से मुलाकात की और करीब एक घंटे तक बातचीत की। इसके बाद पहलवान ने कांग्रेस उम्मीदवार समर्थ शमनूर मल्लिकार्जुन का समर्थन करने पर सहमति जताई। इससे पार्टी को एकजुटता दिखाने में मदद मिली।
उपचुनाव पर असर
दावणगेरे दक्षिण सीट पर उपचुनाव दिवंगत नेता शमनूर शिवशंकरप्पा के निधन के कारण हो रहा है। सादिक पहलवान के समर्थन से कांग्रेस की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इस घटनाक्रम से न सिर्फ इस सीट बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी पार्टी को फायदा मिल सकता है।