कर्नाटक पुलिस महकमे से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है, जहां एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के कथित अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। मामला सामने आते ही प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया। हालांकि, अधिकारी ने सभी आरोपों को झूठा और साजिश करार दिया है।
अश्लील वीडियो वायरल, सरकार ने तुरंत की कार्रवाई
कर्नाटक के डीजीपी (सिविल राइट्स एनफोर्समेंट) के. रामचंद्र राव उस वक्त विवादों में घिर गए, जब सोशल मीडिया पर उनके कथित आपत्तिजनक वीडियो सामने आए। इन वीडियोज़ में उन्हें दफ्तर के भीतर महिलाओं के साथ अनुचित स्थिति में दिखाए जाने का दावा किया गया। वीडियो वायरल होते ही राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
डीजीपी का दावा: वीडियो फर्जी और मनगढ़ंत
निलंबन के बाद के. रामचंद्र राव ने खुद पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो पूरी तरह fabricated हैं और उनके खिलाफ सोची-समझी साजिश के तहत फैलाए गए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिन वीडियो की चर्चा हो रही है, वे अगर पुराने हैं तो करीब आठ साल पहले के हो सकते हैं, जब वे बेलगावी में पदस्थ थे।
सरकारी आदेश में क्या कहा गया
राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि राव का कथित आचरण एक सरकारी अधिकारी की गरिमा के विपरीत है और इससे सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा है। प्रथम दृष्टया इसे All India Services (Conduct) Rules, 1968 का उल्लंघन माना गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने की इजाजत नहीं होगी।
मुख्यमंत्री का सख्त संदेश, निष्पक्ष जांच के निर्देश
मुख्यमंत्री ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है, चाहे अधिकारी कितना भी वरिष्ठ क्यों न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में आरोप सही पाए गए, तो दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने वीडियो की फोरेंसिक जांच कराने के निर्देश भी दिए हैं।
पहले भी विवादों में रह चुके हैं राव
यह पहला मौका नहीं है जब के. रामचंद्र राव विवादों में आए हों। इससे पहले उनकी सौतेली बेटी से जुड़े एक बड़े तस्करी मामले में भी उनका नाम सामने आया था, जिसके बाद उन्हें अनिवार्य अवकाश पर भेजा गया था। हालांकि बाद में वे बहाल हुए और अगस्त में सिविल राइट्स एनफोर्समेंट विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। नए वीडियोज़ ने उन्हें एक बार फिर विवादों के केंद्र में ला खड़ा किया है।