कर्नाटक की राजनीति में हलचल तेज होती जा रही है, जहां मुख्यमंत्री Siddaramaiah ने बड़ा कदम उठाते हुए अपने राजनीतिक सचिव नजीर अहमद को पद से हटा दिया। उपचुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के बाद लिया गया यह फैसला न केवल संगठन में अनुशासन का संदेश देता है, बल्कि अंदरूनी खींचतान और हाईकमान की बढ़ती नाराजगी को भी उजागर करता है।
आरोपों के बाद कड़ी कार्रवाई
दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव के दौरान नजीर अहमद पर पार्टी लाइन के खिलाफ काम करने के आरोप लगे थे। इंटेलिजेंस रिपोर्ट और संगठनात्मक जांच में उनके विरोधी उम्मीदवारों को समर्थन देने और चुनावी गतिविधियों में शामिल होने के संकेत मिले, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने तत्काल कार्रवाई की।
हाईकमान के दबाव में फैसला
कांग्रेस नेतृत्व पहले से ही कर्नाटक इकाई की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए था। जैसे ही रिपोर्ट सामने आई, शीर्ष नेतृत्व ने सख्त रुख अपनाने के निर्देश दिए। ऐसे में Siddaramaiah को अपने करीबी पर ही कार्रवाई करनी पड़ी, जिससे पार्टी में अनुशासन का स्पष्ट संदेश गया।
अंदरूनी खींचतान ने बढ़ाई मुश्किल
राज्य में DK Shivakumar और सिद्धारमैया के बीच नेतृत्व को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। यह मामला उसी तनाव को और गहरा करता दिख रहा है। पार्टी के भीतर गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
कैबिनेट विस्तार बना नया मुद्दा
कई कांग्रेस विधायक मंत्रिमंडल विस्तार की मांग को लेकर सक्रिय हो गए हैं और दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात कर रहे हैं। उनका कहना है कि संगठन में संतुलन और अवसर की जरूरत है, जिससे असंतोष कम किया जा सके।
आगे क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि कर्नाटक कांग्रेस में चल रही यह उठापटक आने वाले समय में बड़े राजनीतिक फैसलों की भूमिका तैयार कर सकती है। DK Shivakumar और सिद्धारमैया के बीच शक्ति संतुलन की यह जंग अभी और तेज हो सकती है।