कार्तिक पूर्णिमा का दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि ज्योतिषीय रूप से भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इस वर्ष यह पर्व 5 नवंबर 2025 को मनाया जाएगा। कहा जाता है कि इस दिन किए गए स्नान, दान और दीपदान के साथ यदि कोई व्यक्ति मोती (Pearl) धारण करता है, तो उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह रत्न मन, विचार और भाग्य तीनों को संतुलित करता है तथा जीवन में सौभाग्य का संचार करता है।
चंद्रदेव का विशेष दिन
कार्तिक पूर्णिमा को चंद्रदेव का दिन कहा गया है, इसलिए इस दिन मोती धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है। मोती चंद्रमा का प्रतीक रत्न है, जो मन की अशांति को दूर करता है और भावनाओं में संतुलन लाता है। जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है या जो मानसिक तनाव में रहते हैं, उनके लिए यह दिन मोती धारण करने का सर्वोत्तम अवसर है।
मोती धारण करने की विधि
कार्तिक पूर्णिमा के दिन मोती धारण करने से पहले “ॐ सों सोमाय नमः” मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए। इसे चांदी की अंगूठी में कनिष्ठा (छोटी) उंगली में धारण करना शुभ होता है। सोमवार या पूर्णिमा के दिन प्रातः स्नान के बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके रत्न धारण करने से इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
लाभ: मानसिक शांति से लेकर धन वृद्धि तक
मोती धारण करने से व्यक्ति के भीतर सौम्यता, धैर्य और आत्मविश्वास बढ़ता है। पारिवारिक संबंधों में सामंजस्य आता है और व्यापारिक मामलों में सफलता प्राप्त होती है। जिन लोगों का मन अक्सर विचलित रहता है, उनके लिए यह रत्न एक आध्यात्मिक ढाल की तरह काम करता है।
साल का सबसे शुभ संयोग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के चंद्रप्रकाश में धारण किया गया मोती जीवन में नई ऊर्जा, स्थिरता और सौभाग्य लाता है। यह दिन पूरे वर्ष का सबसे उत्तम समय माना गया है जब चंद्रदेव की कृपा सबसे अधिक रहती है। इसलिए इस बार 5 नवंबर की पूर्णिमा आपके जीवन को नई दिशा देने का अवसर बन सकती है।