
कार्तिक पूर्णिमा हिन्दू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को आता है और इस दिन को गंगा स्नान, दीपदान, दान-पुण्य और पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। 2025 में कार्तिक पूर्णिमा की तिथि 4 नवंबर की रात से शुरू होकर 5 नवंबर सुबह तक है। ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर भद्रा काल का प्रभाव भी देखा जा रहा है, जिसे शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। यही कारण है कि स्नान और पूजा का समय भद्रा काल के बाहर तय करना अधिक श्रेष्ठ माना जाता है।
स्नान और दान-पुण्य
विशेष रूप से इस वर्ष सुबह का समय 4:52 बजे से 5:44 बजे तक स्नान और दान-पुण्य के लिए उत्तम मुहूर्त माना गया है। इस दौरान गंगा स्नान करना, दीपदान करना और पूजन-अर्चना करना विशेष रूप से लाभदायक रहेगा। भद्रा काल के दौरान कोई भी मांगलिक या शुभ कार्य करना टालना चाहिए क्योंकि यह समय अशुभताओं को जन्म दे सकता है। इसलिए कार्तिक पूर्णिमा पर सुबह जल्दी उठकर स्नान और दान करना सर्वोत्तम विकल्प है।
सकारात्मक ऊर्जा का संचार
स्नान और दान के साथ-साथ इस दिन घर, मंदिर और गंगा घाटों में दीपदान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन किए गए दान और पुण्य कर्म का फल कई गुना बढ़ जाता है और व्यक्ति पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही इस दिन भगवान विष्णु और अन्य देवताओं की पूजा करना भी धार्मिक दृष्टि से फलदायी होता है। यदि सुबह का मुहूर्त किसी कारणवश न निकल पाए तो दिन के समय भी पूजा की जा सकती है, लेकिन भद्रा काल से पहले ही इसे संपन्न करना अधिक उचित है।
आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति
इस प्रकार, कार्तिक पूर्णिमा 2025 में भद्रा के साये के बावजूद शुभता का अधिकतम लाभ उठाने के लिए आज सुबह का समय स्नान, दान और पूजा के लिए आदर्श है। यह दिन आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और धार्मिक लाभ के लिए उपयुक्त अवसर प्रदान करता है। इसलिए इस बार की कार्तिक पूर्णिमा पर सुबह जल्दी उठकर गंगा स्नान करें, दीपदान करें और दान-पुण्य में भाग लेकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं।