करवा चौथ का त्योहार सुहागिनों के लिए सबसे पवित्र व्रत माना जाता है. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में दो ऐसे मंदिर हैं, जहां महिलाओं को करवा चौथ का व्रत रखने की जरूरत ही नहीं होती? सिर्फ चौथ माता के दर्शन मात्र से ही पति की दीर्घायु और वैवाहिक सुख का वरदान प्राप्त होता है. जानिए इन चमत्कारी मंदिरों की कथा...
सिद्धपीठ चौथ माता मंदिर, राजस्थान — जहां अधूरी नहीं रहती कोई मनोकामना
राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के बरवाड़ा कस्बे में स्थित सिद्धपीठ चौथ माता मंदिर पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है. अरावली की पहाड़ियों पर बसे इस मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. मान्यता है कि जो भी महिला यहां सच्चे मन से चौथ माता का आशीर्वाद लेती है, उसके पति की उम्र बढ़ जाती है और उसे अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है.
मंदिर का निर्माण राजा भीम सिंह द्वारा कराया गया था, जो मां गौरी के भक्त थे. चौथ माता को मां पार्वती का ही दूसरा रूप माना गया है. करवाचौथ और नवरात्रि के समय यहां हजारों महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा के लिए दर्शन करने पहुंचती हैं. यहां की सबसे बड़ी मान्यता यह है कि चौथ माता के दरबार में मांगी गई कोई भी मुराद कभी अधूरी नहीं रहती.
उज्जैन का करवा चौथ माता मंदिर — साल में सिर्फ एक दिन खुलता है दरबार
बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में स्थित करवा चौथ माता मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है. यह मंदिर उज्जैन के जीवनखेड़ी गांव में उन्हेल बायपास के पास बना है. इसकी विशेषता यह है कि मंदिर साल में सिर्फ करवा चौथ के दिन ही खुलता है और पूरे साल बंद रहता है.
यहां मां पार्वती अपने दोनों पुत्रवधुओं ऋद्धि और सिद्धि तथा भगवान गणेश के साथ विराजमान हैं. कहा जाता है कि इस मंदिर की स्थापना डॉ. कैलाश नागवंशी ने अपनी माता के सम्मान में की थी. करवा चौथ के दिन यहां सुहागिनें पारंपरिक वेशभूषा में सजधज कर आती हैं और माता से अपने पति की लंबी आयु, सुख और समृद्धि का वरदान मांगती हैं.
दर्शन मात्र से मिलता है अखंड सौभाग्य
राजस्थान और उज्जैन के इन दोनों मंदिरों की सबसे बड़ी मान्यता यही है कि यहां करवा चौथ का व्रत रखे बिना भी माताएं और सुहागिनें वरदान पा सकती हैं. भक्तों का विश्वास है कि चौथ माता की कृपा से विवाह में आने वाली हर कठिनाई दूर होती है और दांपत्य जीवन सुखमय बनता है.
इस करवा चौथ पर अगर आप व्रत नहीं रख पा रही हैं, तो चौथ माता के इन सिद्ध स्थलों के दर्शन मात्र से ही पूर्ण फल प्राप्त किया जा सकता है.