
करवा चौथ का व्रत हर विवाहित स्त्री के लिए विशेष महत्व रखता है। यह व्रत पति की लंबी उम्र, सुख और सौभाग्य के लिए किया जाता है। जब कोई महिला इस व्रत को लगातार 5, 7 या 11 वर्षों तक करती है, तब वह उद्यापन (व्रत का समापन) करती है। उद्यापन करना एक शुभ और आवश्यक प्रक्रिया होती है, जिससे व्रत पूर्ण रूप से संपन्न माना जाता है। करवा चौथ व्रत का उद्यापन कैसे और कब करना चाहिए, इसके बारे में बहुत सी महिलाओं को संदेह रहता है। आइए जानते हैं इसकी सही और शास्त्रोक्त विधि।
करवा चौथ उद्यापन कब करें?
उद्यापन व्रत के संकल्प के अनुसार किया जाता है। यदि आपने किसी विशेष संख्या (जैसे 5, 7 या 11 बार) करवा चौथ व्रत रखने का संकल्प लिया है, तो उस गिनती के पूरे होने पर अगली बार व्रत करते हुए उद्यापन किया जाता है। उद्यापन करवा चौथ के दिन ही किया जाता है, यानी उस वर्ष जब अंतिम बार व्रत रखा जाए।
करवा चौथ व्रत उद्यापन विधि
व्रत रखें और पूजा करें
उद्यापन वाले दिन सामान्य करवा चौथ की तरह व्रत रखें। पूरे विधि-विधान से मां पार्वती, भगवान शिव, गणेश जी और करवा माता की पूजा करें।
सुहाग सामग्री का थाल तैयार करें
7, 11 या 13 सुहागिन महिलाओं के लिए श्रृंगार और पूजन सामग्री जैसे – बिंदी, चूड़ी, सिंदूर, मेहंदी, कंघी, बिछिया, नारियल आदि से सजे थाल तैयार करें।
करवा दें
हर महिला को एक-एक करवा (जिसमें गेहूं, चावल, सिक्का और थोड़ा सा पानी हो) भेंट करें। साथ ही उन्हें भोजन या मिठाई भी दें।
कहानी और आरती
व्रत की कथा सभी को सुनाएं और मिलकर आरती करें। आरती के बाद सभी महिलाओं को आदरपूर्वक विदा करें।