Karwa Chauth Chhalni Ritual : करवा चौथ पर चांद निकलने का इंतजार हर व्रत रखने वाली महिला को रहता है। इस दिन सजना-संवरना, पूजा की थाली तैयार करना और चांद के दर्शन करना त्योहार का खास हिस्सा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चांद और पति का चेहरा छलनी से ही क्यों देखा जाता है? आखिर इस छोटी-सी परंपरा के पीछे क्या मान्यता जुड़ी है और करवा चौथ की पूजा में इसका इतना महत्व क्यों है? दरअसल, इस रस्म को प्यार, विश्वास और खुशहाल शादीशुदा जिंदगी की कामना से जोड़कर देखा जाता है। चलिए जानते हैं।
छलनी से चांद देखने की परंपरा
करवा चौथ पर महिलाएं चांद निकलने के बाद छलनी से चंद्रमा के दर्शन करती हैं। इसके बाद उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखती हैं। यह रस्म कई परिवारों में पीढ़ियों से निभाई जा रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस परंपरा के जरिए महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और शादीशुदा जिंदगी में खुशहाली की कामना करती हैं। हालांकि, अलग-अलग जगहों पर इसे निभाने का तरीका थोड़ा अलग भी हो सकता है।
क्या है छलनी से चेहरा देखने का मतलब
धार्मिक मान्यताओं में छलनी को एक खास प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। इसके कई छेदों से होकर रोशनी दिखाई देती है। एक मान्यता के अनुसार, छलनी से चांद और पति का चेहरा देखने का मतलब रिश्ते में अच्छी बातों को जगह देना और बुरी बातों को दूर रखना है। इसे वैवाहिक जीवन में प्यार, भरोसे और सकारात्मकता बनाए रखने की कामना से भी जोड़ा जाता है।
चंद्रमा की पूजा क्यों होती है
करवा चौथ पर चंद्रमा की पूजा का भी खास महत्व है। धार्मिक मान्यताओं में चंद्रमा को शांति और मन से जोड़कर देखा जाता है। महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने पति की अच्छी सेहत, लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं। चांद के निकलने के बाद पूजा पूरी करने की परंपरा है। इसी वजह से शाम होते ही आसमान में चंद्र दर्शन का इंतजार शुरू हो जाता है। The Times of India +1
वीरावती की कथा से भी जुड़ी है मान्यता
करवा चौथ पर वीरावती की कथा सुनने की परंपरा भी काफी प्रचलित है। लोककथा के अनुसार, वीरावती के भाइयों ने अपनी बहन की भूख देखकर दीपक की रोशनी से नकली चांद दिखा दिया था। वीरावती ने उसे असली चांद समझकर व्रत खोल लिया। कथा में आगे उनके पति की तबीयत बिगड़ने और फिर उनकी भक्ति से जुड़ी घटनाओं का जिक्र आता है। कई लोग छलनी से चांद देखने की रस्म को असली चंद्र दर्शन की अहमियत से भी जोड़ते हैं।
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पूजा के बाद ऐसे पूरा होता है व्रत
करवा चौथ पर महिलाएं अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा करती हैं, कथा सुनती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। इसके बाद छलनी से चांद और पति का चेहरा देखकर व्रत खोलती हैं। कई घरों में पति अपनी पत्नी को पानी और मिठाई खिलाकर व्रत पूरा करवाते हैं। आज कई जोड़े एक-दूसरे के लिए भी व्रत रखते हैं या इस दिन साथ पूजा करते हैं। इस तरह करवा चौथ अब सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि साथ निभाने, प्यार जताने और रिश्ते को खास बनाने का मौका भी बन गया है।