पश्चिम एशिया में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने कश्मीर के कालीन उद्योग को गहरी चोट पहुंचाई है। यह उद्योग अपनी बारीक कारीगरी और ऐतिहासिक पहचान के लिए दुनियाभर में मशहूर है, लेकिन मौजूदा हालात में इसके सबसे बड़े बाजार खाड़ी देश प्रभावित हो गए हैं। कश्मीर से होने वाले हस्तशिल्प निर्यात का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं देशों पर निर्भर है, जो अब लगभग ठप हो चुका है।
ऑर्डर कैंसिल, नए कारोबार पर ब्रेक
व्यापारियों के अनुसार, पुराने ऑर्डर लगातार रद्द हो रहे हैं और नए ऑर्डर मिलना लगभग बंद हो गया है। अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों के रद्द होने से भी बाजार में नई संभावनाएं खत्म हो गई हैं। इससे कालीन उद्योग के साथ-साथ पश्मीना, कानी बुनाई, सोज़नी कढ़ाई और लकड़ी के काम जैसे पारंपरिक उद्योग भी प्रभावित हुए हैं। यह पूरा सेक्टर कश्मीर की निर्यात अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
कारीगरों और व्यापारियों की बढ़ी मुश्किलें
इस संकट का सबसे बड़ा असर कारीगरों और छोटे व्यापारियों पर पड़ा है। हजारों बुनकर, रंगाई करने वाले और अन्य कामगार सीधे इस उद्योग से जुड़े हैं। ऑर्डर बंद होने से उनके पास काम नहीं बचा है और भुगतान में भी देरी हो रही है। कई निर्यातकों को भारी कर्ज और ब्याज का सामना करना पड़ रहा है, जिससे लिक्विडिटी संकट गहरा गया है।
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शिपमेंट महंगा, व्यापार और कमजोर
युद्ध के कारण हवाई और समुद्री रास्तों में बाधा आने से माल ढुलाई की लागत तेजी से बढ़ी है। इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ने और जोखिम बढ़ने से एक्सपोर्ट और महंगा हो गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कश्मीरी उत्पादों की प्रतिस्पर्धा भी कमजोर पड़ रही है। कई व्यापारी अब नए सौदे करने से भी बच रहे हैं।
पर्यटन गिरा, मांग और घटी
पहलगाम जैसी घटनाओं के बाद पर्यटन पहले ही प्रभावित था, जिससे स्थानीय बिक्री में कमी आई। आमतौर पर पर्यटक सीजन में मांग बढ़ती है, लेकिन इस बार हालात उलट हैं। व्यापारियों के मुताबिक, ग्राहक फैसले टाल रहे हैं और भुगतान भी समय पर नहीं मिल रहा, जिससे दोहरी मार पड़ रही है।
भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता
आंकड़ों के अनुसार, कश्मीर के हस्तशिल्प निर्यात में पहले ही गिरावट दर्ज की जा चुकी है और अब यह संकट और गहरा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदार स्थायी रूप से दूसरे बाजारों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे कश्मीर का यह पारंपरिक उद्योग लंबे समय के लिए नुकसान में जा सकता है।