Katni CSP Case ---कटनी की तत्कालीन CSP नेहा पच्चीसिया FIR दर्ज होने के बाद से लगातार गैरहाजिर हैं। निलंबन के बाद भोपाल पुलिस मुख्यालय अटैच किए जाने के बावजूद उन्होंने वहां जॉइनिंग नहीं दी। अब पुलिस की आठ टीमें उनके संभावित ठिकानों पर तलाश कर रही हैं। कटनी स्थित सरकारी बंगले पर ताला लगा है, जबकि बाहर अब भी उनके नाम की नेम प्लेट लगी हुई है। मोबाइल बंद होने से पुलिस की चुनौती और बढ़ गई है।
बंगले पर ताला, बाहर लगी है नेम प्लेट
कटनी के सिविल लाइन स्थित सरकारी आवास के मुख्य गेट पर ताला लगा है। बंगले के बाहर नेहा पच्चीसिया के नाम की नेम प्लेट अब भी लगी हुई है। पुलिस के मुताबिक, सरकारी आवास में उनका सामान रखा हुआ है और फिलहाल इसे किसी दूसरे अधिकारी को आवंटित नहीं किया गया है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बंगला खाली कराया जाएगा।
भोपाल में भी नहीं दी जॉइनिंग
FIR दर्ज होने के बाद से नेहा पच्चीसिया का मोबाइल बंद बताया जा रहा है। निलंबन के बाद उन्हें भोपाल पुलिस मुख्यालय अटैच किया गया था, लेकिन उन्होंने वहां भी जॉइन नहीं किया। पुलिस की टीमें भोपाल के अलावा उज्जैन, इंदौर, जबलपुर, कटनी और राजस्थान में संभावित ठिकानों पर दबिश दे चुकी हैं।
जमीन मामले में तीन लोगों पर FIR
यह मामला कुठला थाना क्षेत्र की खसरा नंबर 2618/1 की जमीन से जुड़ा है। 19 अगस्त को नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी। पुलिस ने धोखाधड़ी, पद के दुरुपयोग और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया है। तीनों पर 10-10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित है।
82.86 लाख की जमीन 18.20 लाख में कराने का आरोप
जांच के मुताबिक, कंहवारा की जमीन का गाइडलाइन मूल्य 82.86 लाख रुपए था, जबकि इसकी रजिस्ट्री 18.20 लाख रुपए में मारूफ अहमद हनफी के नाम कराए जाने का आरोप है। पुलिस जांच में मारूफ को कथित तौर पर फ्रंटमैन बताया गया है। जमीन की रकम में क्षितिज राज बारापात्रे के खातों से फंडिंग किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
अग्रिम जमानत खारिज, 75 लाख मांगने का भी आरोप
29 अगस्त को अदालत ने नेहा पच्चीसिया की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। 2 सितंबर को सह-आरोपी मारूफ अहमद हनफी की अग्रिम जमानत भी निरस्त हो गई। मामले में पुलिस ने ASP अंजना तिवारी के नेतृत्व में आठ सदस्यीय SIT बनाई है। वहीं, एक हत्या के आरोपी के परिवार ने आरोप लगाया है कि जेल से बाहर निकलवाने के नाम पर 75 लाख रुपए मांगे गए और जमीन बेचने का दबाव बनाया गया।