कटनी जिले में बन रही स्लीमनाबाद टनल अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को परियोजना का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की समीक्षा की। यह टनल पूरी होने के बाद नर्मदा का पानी विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के छह जिलों तक पहुंचेगा। परियोजना से करीब 1450 गांवों में सिंचाई और पेयजल की सुविधाएं मजबूत होंगी, जिससे लाखों लोगों और किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
6 जिलों के किसानों के लिए बनेगी नई उम्मीद
स्लीमनाबाद टनल परियोजना पूरी होने के बाद जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिले के लगभग 1450 गांवों को इसका लाभ मिलेगा। परियोजना के माध्यम से करीब 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे विंध्य और महाकौशल क्षेत्र में खेती की तस्वीर बदलने की उम्मीद जताई जा रही है। लंबे समय से पानी की कमी से जूझ रहे क्षेत्रों को इस परियोजना से बड़ी राहत मिलने की संभावना है।
आधुनिक तकनीक से पूरा हुआ चुनौतीपूर्ण निर्माण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि टनल निर्माण का कार्य कई वर्षों तक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में चलता रहा। शुरुआती वर्षों में निर्माण की गति धीमी थी, लेकिन वर्ष 2016 के बाद जर्मनी से लाई गई आधुनिक मशीनों की मदद से खुदाई में तेजी आई। इंजीनियरों, तकनीशियनों और श्रमिकों ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में काम किया। लगातार प्रयासों के बाद अब यह परियोजना लगभग पूरी होने की स्थिति में पहुंच गई है।
100 वर्षों तक सुरक्षित रहने का दावा
परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मजबूत संरचना है। अधिकारियों के अनुसार टनल को इस तरह तैयार किया गया है कि यह लगभग 100 वर्षों तक सुरक्षित रह सकेगी। कई स्थानों पर इसकी गहराई जमीन से करीब 120 फीट नीचे तक है। परियोजना में आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग किया गया है, जिससे इसे भूकंप जैसी प्राकृतिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इसे इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
सिंचाई के साथ पेयजल और ऊर्जा को भी मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगी। इससे क्षेत्र में पेयजल उपलब्धता बेहतर होगी और कुछ स्थानों पर जलविद्युत उत्पादन की संभावनाएं भी विकसित की जाएंगी। परियोजना पर लगभग 1600 करोड़ रुपये की लागत आ रही है, जिसमें केंद्र सरकार ने लगभग 275 करोड़ रुपये का सहयोग दिया है। राज्य सरकार का मानना है कि यह योजना कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास को भी गति देगी।
किसानों से जमीन नहीं बेचने की अपील
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से अपनी कृषि भूमि सुरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाएं बढ़ने के बाद यह इलाका कृषि उत्पादन के लिहाज से नई पहचान बना सकता है। उनके अनुसार बेहतर पानी, आधुनिक खेती और बढ़ती उत्पादकता से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा पलायन में कमी आएगी। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।