भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज के पिता कौशल स्वराज का निधन हो गया। 73 वर्षीय कौशल को दोपहर के वक्त सीने में दर्द की शिकायत हुई थी। इसके बाद उन्हें एम्स ले जाया गया। यहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दिल्ली भाजपा ईकाई की ओर से बयान सामने आया है कि मिजोरम के गर्वनर और वरिष्ठ वकील कौशल स्वराज का निधन हो गया। इससे राजनीतिक जगत में शोक की लहर है।
अपनी भावनाओं को व्यक्त किया
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज भी अपने पिता और माता के साथ के दिनों को याद करते हुए भावुक हो गईं। बांसुरी स्वराज ने सोशल मीडिया पर पिता के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। उनके स्नेह, अनुशासन, सरलता और राष्ट्रप्रेम को याद किया। उन्होंने कहा कि पिता की विरासत और आशीर्वाद उनकी आगे की यात्रा का आधार होंगे।
आपका जाना हृदय की सबसे गहरी पीड़ा
उन्होंने पिता के निधन की जानकारी देते हुए एक्स पर लिखा, 'पापा स्वराज कौशल जी, आपका स्नेह, आपका अनुशासन, आपकी सरलता, आपका राष्ट्रप्रेम और आपका अपार धैर्य मेरे जीवन की रोशनी हैं। ये कभी मंद नहीं होगी. आपका जाना हृदय की सबसे गहरी पीड़ा है। मन यही विश्वास को थामे हुए है कि आप अब मां के साथ पुनः मिल गए हैं, ईश्वर के सान्निध्य में, शाश्वत शांति में.'
पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और कौशल की पहली मुलाकात हरियाणा के एसडी कॉलेज में हुई थी। यहां पर सुषमा लॉ की पढ़ाई में लगी थीं। स्वराज यहां की फैकल्टी से जुड़े थे। वह दोनों अक्सर डिबेट्स और लॉ से जुड़े कार्यक्रम में हिस्सा लिया करते थे। दोनों की बिल्कुल अलग-अलग विचारधारा रही थी।
1975 को इमरजेंसी में दोनों ने शादी कर ली
इसके बाद बहस और तर्क करते-करते दोनों एक दूसरे के इतना करीब आ गए कि उनमें प्यार हो गया। मगर उस प्रेम विवाह आसान न था। फिर भी दोनों ने हिम्मत दिखाई। परिवार वालों को मनाया और 13 जुलाई 1975 को इमरजेंसी में दोनों ने शादी कर ली। इसके बाद सुषमा राजनीतिक रूप से सक्रिय हो गई। उन्होंने दिल्ली की सीएम से लेकर भारत के विदेश मंत्रालय का पद संभाला। वहीं कौशल स्वराज सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने लगे। वे 37 साल की आयु में मिजोरम के राज्यपाल भी बने। बाद में वह राज्यसभा सांसद भी रहे। दोनों का नाम लिमका बुक आफ रिकॉर्ड में दर्ज है।