Kejriwal Attacks E20 Petrol: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने E20 पेट्रोल को लेकर केंद्र सरकार पर एक बार फिर निशाना साधा है। शनिवार को उन्होंने कुछ वाहन मालिकों और कार मैकेनिकों से मुलाकात कर E20 ईंधन के इस्तेमाल से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की। केजरीवाल ने दावा किया कि इस ईंधन के कारण कई वाहनों में तकनीकी खराबियां बढ़ी हैं, माइलेज कम हुआ है और मरम्मत का खर्च बढ़ने से आम लोग आर्थिक बोझ झेल रहे हैं।
वाहन मालिकों और मैकेनिकों ने साझा किए अनुभव
केजरीवाल ने कहा कि मुलाकात के दौरान कई वाहन मालिकों ने बताया कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद उनकी गाड़ियों का माइलेज पहले की तुलना में कम हो गया है। वहीं, कार मैकेनिकों का कहना था कि हाल के दिनों में ऐसे वाहनों की संख्या बढ़ी है, जिन्हें E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद तकनीकी दिक्कतों के चलते वर्कशॉप में लाया जा रहा है। इन अनुभवों का एक वीडियो भी केजरीवाल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया।
केंद्र सरकार से नीति पर पुनर्विचार की मांग
सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए केजरीवाल ने कहा कि सरकार को टीवी इंटरव्यू और प्रेस कॉन्फ्रेंस के बजाय जमीनी हकीकत पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि E20 नीति का असर मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है और लोगों पर इसे जबरन लागू नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यदि किसी सरकारी नीति से आम नागरिकों का खर्च बढ़ रहा है तो उसकी समीक्षा की जानी चाहिए।
ये वीडियो ज़रूर देखें…
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) July 12, 2026
कल मैंने दिल्ली में कुछ कार मैकेनिकों और गाड़ी मालिकों से Ethanol पर बात की। E20 के कारण ख़राब हुई गाड़ियों की लाइन लगी हुई थी। गाड़ियों के माइलेज में भी भारी गिरावट है। सब परेशान हैं।
मोदी सरकार को समझना होगा कि टीवी पर झूठे इंटरव्यू देने और फर्जी प्रेस… pic.twitter.com/n2oi6YF3FV
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बढ़ती लागत पर जताई चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले से महंगाई का सामना कर रहे लोगों के लिए कम माइलेज और वाहनों की बढ़ती मेंटेनेंस लागत नई परेशानी बन गई है। उनका कहना है कि यदि ईंधन के कारण वाहन मालिकों का खर्च लगातार बढ़ता है तो इसका सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से आम लोगों की व्यावहारिक समस्याओं को प्राथमिकता देने की अपील की।
विशेषज्ञों और ऑटो कंपनियों से संवाद की मांग
केजरीवाल ने सुझाव दिया कि E20 पेट्रोल को लेकर सरकार को विशेषज्ञों, ऑटोमोबाइल कंपनियों, मैकेनिकों और उपभोक्ताओं के साथ व्यापक चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी नई नीति को लागू करने से पहले उसके प्रभाव का विस्तृत आकलन आवश्यक है, ताकि जनता को अनावश्यक आर्थिक और तकनीकी परेशानियों का सामना न करना पड़े।