Petrol And Diesel Prices: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आने के बावजूद देश में ईंधन के दाम कम नहीं किए गए। केजरीवाल का दावा है कि वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमत करीब 115 डॉलर प्रति बैरल से घटकर लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल हो चुकी है, इसलिए इसका लाभ आम उपभोक्ताओं को भी मिलना चाहिए।
कीमतें कम करने की उठाई मांग
केजरीवाल ने कहा कि उनकी गणना के अनुसार पेट्रोल की कीमत लगभग 82 रुपये प्रति लीटर होनी चाहिए और यदि ई-20 ईंधन के आधार पर मूल्य तय किया जाए तो यह करीब 70 रुपये प्रति लीटर तक आ सकती है। उन्होंने कहा कि इसी तरह डीजल की कीमतों में भी कमी होनी चाहिए। उनके मुताबिक ईंधन सस्ता होने से परिवहन लागत घटेगी और महंगाई पर भी सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार नुकसान की भरपाई का तर्क देती है, तो उसे यह भी बताना चाहिए कि पहले हुए अतिरिक्त मुनाफे का उपयोग क्यों नहीं किया गया।
E20 फ्यूल पर कंपनियों से मांगा जवाब
इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने देश की 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों को पत्र लिखकर E20 इथेनॉल मिश्रित ईंधन के वाहनों के माइलेज, इंजन की कार्यक्षमता और सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था। उन्होंने कंपनियों से सात दिनों के भीतर लिखित जवाब देने को कहा। उनके अनुसार मारुति सुजुकी इंडिया, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर और हीरो मोटोकॉर्प को अलग-अलग पत्र भेजे गए, जबकि अन्य वाहन निर्माताओं से भी उपभोक्ताओं की चिंताओं पर अपनी राय देने को कहा गया है।
महंगाई और ईंधन नीति पर उठाए सवाल
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि जब-जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम हुईं, तब देश में पेट्रोल और डीजल के दाम उसी अनुपात में नहीं घटाए गए। उन्होंने कहा कि यदि युद्ध के दौरान हुए नुकसान का हवाला दिया जाता है, तो बाद में हुए अतिरिक्त लाभ को भी उसी आधार पर समायोजित किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि मौजूदा समय में उपभोक्ताओं से ली जा रही कीमतों की समीक्षा कर उन्हें राहत दी जानी चाहिए।
दिल्ली में जलभराव को लेकर भी सरकार पर हमला
ईंधन की कीमतों के साथ-साथ अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में मानसून के दौरान जलभराव की स्थिति पर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में मिंटो ब्रिज जैसे संवेदनशील स्थानों पर जलभराव की समस्या दूर की गई थी, लेकिन अब शहर के कई हिस्सों में पानी भर रहा है, सड़कें क्षतिग्रस्त हैं और सफाई व्यवस्था भी प्रभावित दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक वर्ष के भीतर दिल्ली की बुनियादी व्यवस्थाओं की स्थिति पहले की तुलना में काफी खराब हो गई है।