Kejriwal SIR Controversy : दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने हाल के वर्षों में हुए कई विधानसभा चुनावों को रद्द कर दोबारा चुनाव कराने की मांग उठाई है। इस मांग के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है। केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए और कई गंभीर आरोप लगाए।
चुनाव आयोग को लेकर क्या बोले केजरीवाल?
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि चुनाव आयोग किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि तीन सदस्यों का संस्थान है। उनके अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य चुनाव आयुक्त मिलकर फैसले लेते हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ फैसले आयोग की सामूहिक सहमति के बिना लिए गए। केजरीवाल ने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो उन फैसलों की वैधता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि इन आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
किन राज्यों के चुनाव पर उठाए सवाल?
केजरीवाल ने दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों का नाम लेते हुए कहा कि इन चुनावों की प्रक्रिया की समीक्षा होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि चुनावी व्यवस्था में गड़बड़ी साबित होती है तो चुनाव दोबारा कराए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि पिछले कुछ वर्षों में जारी कुछ आदेशों और निर्देशों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
चिट्ठियों का किया जिक्र
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केजरीवाल ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि चुनाव आयोग के भीतर कुछ प्रक्रियाओं को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। उन्होंने कहा कि कुछ चुनाव आयुक्तों की ओर से कथित तौर पर लिखित शिकायतें भी की गईं। उनके मुताबिक इन शिकायतों में आयोग की कार्यप्रणाली और फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए थे। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
SIR प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
आम आदमी पार्टी प्रमुख ने SIR प्रक्रिया को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती गई। केजरीवाल का कहना है कि मतदाता सूची में हुए बदलावों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो उससे जुड़े फैसलों की समीक्षा की जाए। दूसरी ओर चुनाव आयोग पहले भी मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बता चुका है।
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अब आगे क्या होगा?
केजरीवाल के इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। एक तरफ आम आदमी पार्टी चुनावी प्रक्रिया की जांच की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर इस मुद्दे पर चुनाव आयोग और अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी। आने वाले दिनों में यह विवाद और कितना आगे बढ़ता है, इस पर देश की राजनीति की निगाहें टिकी रहेंगी।