केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन को सोशल मीडिया पर बम से उड़ाने की धमकी देने का मामला गंभीर रूप ले चुका है। खुद को नन बताने वाली टीना जोस नाम की महिला पर साइबर पुलिस ने आपराधिक उकसावे और धमकाने के आरोप में FIR दर्ज की है। दिल्ली स्थित एक वकील की शिकायत पर शुरू हुई इस जांच में पुलिस फेसबुक कमेंट के स्रोत तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। घटना के सामने आते ही धार्मिक संगठन ने भी टीना से दूरी बना ली है।
फेसबुक कमेंट से शुरू हुआ विवाद, सीएम को दी गई धमकी
यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक व्यक्ति ने स्थानीय निकाय चुनाव अभियान से जुड़ा पोस्ट साझा किया। उसी पोस्ट पर टीना जोस ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री विजयन पर बम से हमला करने वाली टिप्पणी की। उनके इस कमेंट ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी, जिसके बाद इसकी शिकायत साइबर पुलिस तक पहुंच गई।
साइबर पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, दो धाराओं में कार्रवाई
दिल्ली के एक वकील द्वारा दायर शिकायत के आधार पर तिरुवनंतपुरम सिटी साइबर पुलिस ने टीना जोस पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 192 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसावा) और 351(2) (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब कमेंट के तकनीकी स्रोत की जांच कर रही है और जल्द ही टीना से पूछताछ शुरू की जाएगी।
धार्मिक संगठन ने किया किनारा—सदस्यता सालों पहले ही रद्द
मामला सामने आने के बाद उस धार्मिक संगठन ने प्रेस बयान जारी किया, जिससे टीना जोस कभी जुड़ी थीं। संगठन ने बताया कि उनकी सदस्यता 2009 में ही रद्द कर दी गई थी और तब से उन्हें धार्मिक वस्त्र पहनने की अनुमति भी नहीं है। संगठन ने स्पष्ट किया कि उनके कृत्य पूरी तरह व्यक्तिगत हैं और संस्था का उनसे कोई संबंध नहीं।
लॉ की पढ़ाई और कानूनी लड़ाई का भी आया जिक्र
टीना जोस ने लॉ की पढ़ाई पूरी की थी और वकालत करने के लिए उन्होंने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में उन नियमों को चुनौती दी थी, जिनमें धार्मिक जीवन अपनाने वाले व्यक्तियों को वकालत से रोकने का प्रावधान था। बाद में उन्हें बार काउंसिल में पंजीकृत भी किया गया था। अब यह पृष्ठभूमि फिर चर्चा में है।
सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा, पुलिस ने बढ़ाई सतर्कता
कमेंट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं बढ़ गई हैं। मुख्यमंत्री के खिलाफ धमकी का मामला होने से सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं। पुलिस का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियां गंभीर अपराध की श्रेणी में आती हैं और कानूनी कार्रवाई तय है।