Hazil JB Pilot Journey : कहते हैं कि अगर इंसान अपने सपने को पूरा करने की ठान ले, तो मुश्किलें भी उसका रास्ता नहीं रोक सकतीं। केरल के हैजिल जेबी की कहानी इसकी मिसाल है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई में 20 विषयों में बैकलॉग, पैसों की कमी, पिता को खोने का दुख और कई नौकरियों के बाद भी उन्होंने पायलट बनने का सपना नहीं छोड़ा। कभी वह जोमैटो के लिए डिलीवरी का काम करते थे, तो कभी गणित पढ़ाकर और गाड़ी चलाकर अपना खर्च चलाते थे। आज वह फिलीपींस में पायलट की ट्रेनिंग ले रहे हैं और अपने सपने को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
बचपन में देखा था पायलट बनने का सपना
हैजिल जेबी केरल के त्रिशूर जिले के कोडुंगल्लूर के रहने वाले हैं। वह एक साधारण परिवार में पले-बढ़े, जहां पैसों की कमी के कारण परिवार को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। बचपन में विमान देखकर उनके मन में भी पायलट बनने की इच्छा जगी। हालांकि, परिवार की सलाह पर उन्होंने इंजीनियरिंग में दाखिला ले लिया। लेकिन इस पढ़ाई में उनका मन नहीं लगा और धीरे-धीरे उनके 20 विषयों में बैकलॉग हो गए।
20 बैकलॉग के बाद भी नहीं मानी हार
इंजीनियरिंग में लगातार असफल होने के बाद हैजिल ने अपनी पढ़ाई पूरी करने का फैसला किया। उन्होंने मेहनत करके सभी बैकलॉग पास किए और छह महीने की देरी से डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों में जाने की कोशिश की, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि इस रास्ते से पायलट बनने का मौका मिल सकता है। लेकिन कई कोशिशों के बावजूद उन्हें सफलता नहीं मिली।
जोमैटो में काम किया, गणित भी पढ़ाया
अपने खर्च चलाने के लिए हैजिल ने कोच्चि में जोमैटो डिलीवरी पार्टनर के तौर पर काम किया। इसके बाद वह बेंगलुरु गए और बायजू में गणित के शिक्षक बने। उन्होंने ट्रक और बस चलाने जैसे काम भी किए। नौकरी करते हुए वह अपने पायलट बनने के सपने को पूरा करने के रास्ते तलाशते रहे। इसी बीच कोविड महामारी के दौरान उनके पिता की तबीयत बिगड़ गई और जून 2021 में उनका निधन हो गया। इससे परिवार की जिम्मेदारियां भी हैजिल पर आ गईं।
शिक्षा लोन लेकर पहुंचे फिलीपींस
पायलट की ट्रेनिंग का खर्च उठाना हैजिल के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। उनके पास इतनी बचत नहीं थी कि वह अपने दम पर प्रशिक्षण पूरा कर सकें। उन्होंने कई बैंकों में शिक्षा लोन के लिए आवेदन किया और लंबे इंतजार के बाद उन्हें लोन मिल गया। इसके बाद वह फिलीपींस पहुंचे और वहां फास्ट एविएशन अकादमी में पायलट की ट्रेनिंग शुरू की।
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अभी बाकी है मंजिल तक पहुंचने का सफर
हैजिल ने निजी पायलट लाइसेंस का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है और अब उनका लक्ष्य कमर्शियल पायलट बनना है। हालांकि, प्रशिक्षण पूरा करना और किसी एयरलाइन में नौकरी पाना अलग-अलग पड़ाव हैं। उनकी कहानी बताती है कि मुश्किल हालात में भी अपने लक्ष्य के लिए कोशिश जारी रखी जा सकती है। हैजिल का सफर अभी जारी है, लेकिन वह अपने सपने के पहले से कहीं ज्यादा करीब पहुंच चुके हैं।