Kerala: केरल की रहने वाली भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन में फांसी की सजा से बचाने के लिए अब आखिरी प्रयास किए जा रहे हैं। उन पर साल 2017 में अपने यमनी बिजनेस पार्टनर तालाल अब्दो महदी की हत्या का आरोप है, जिसके चलते 2020 में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी। उनकी अंतिम अपील 2023 में खारिज हो चुकी है और अब 16 जुलाई 2024 को फांसी की तारीख तय है। फिलहाल वे यमन की राजधानी सना की जेल में बंद हैं।
धर्मगुरु कर रहे ब्लड मनी के तहत समझौते की कोशिश
भारत के मशहूर मुस्लिम धर्मगुरु और ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद (कांथापुरम मुसलियार) ने इस मामले में पहल की है। 94 वर्षीय मुसलियार यमन के धार्मिक नेताओं से लगातार संपर्क में हैं और शरिया कानून के तहत ब्लड मनी (मुआवजा) के जरिए फांसी टालने का प्रयास कर रहे हैं। शरिया कानून में यदि मृतक का परिवार मुआवजा स्वीकार कर ले, तो आरोपी की सजा माफ की जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक मृतक परिवार के साथ बातचीत आगे बढ़ रही है, हालांकि अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
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सरकार की सीमाएं, धर्मगुरु की सक्रियता
भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में सीमित भूमिका निभा सकती है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सरकार यमन के प्रभावशाली लोगों से संपर्क में है, लेकिन अंतिम फैसला मृतक के परिवार पर निर्भर करता है। उधर, मुसलियार ने अपने मुख्यालय में एक विशेष कार्यालय स्थापित किया है ताकि निमिषा की फांसी टालने के लिए बातचीत और प्रयास व्यवस्थित ढंग से हो सकें।