केरल में स्थानीय निकाय चुनाव 2025 की मतगणना ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। शुरुआती और मध्य रुझानों में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) स्पष्ट बढ़त बनाता नजर आ रहा है, जबकि सत्ताधारी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) कई मोर्चों पर पिछड़ता दिख रहा है। राजधानी तिरुवनंतपुरम में भाजपा के नेतृत्व वाले NDA की मजबूत मौजूदगी ने राजनीतिक समीकरणों को और रोचक बना दिया है।
शुरुआती रुझान: यूडीएफ की आक्रामक बढ़त
मतगणना के ताजा आंकड़ों के अनुसार, यूडीएफ नगर निगमों, नगरपालिकाओं और पंचायतों में लगातार बढ़त बनाए हुए है। कुल 6 नगर निगमों में से यूडीएफ 3 से 4 निगमों में आगे चल रहा है, जिनमें कोच्चि, त्रिशूर और कन्नूर प्रमुख हैं। नगरपालिकाओं में भी कांग्रेस गठबंधन का दबदबा नजर आया है, जहां वह 50 से अधिक नगरपालिकाओं में बढ़त बनाए हुए है।
लेफ्ट के गढ़ों में भी चुनौती
सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाला एलडीएफ कोल्लम और कोझिकोड जैसे कुछ पारंपरिक गढ़ों में आगे जरूर है, लेकिन कुल आंकड़ों में उसे यूडीएफ से कड़ी चुनौती मिल रही है। जिला पंचायत और ब्लॉक पंचायत स्तर पर भी एलडीएफ और यूडीएफ के बीच सीधी टक्कर दिखाई दे रही है। कई क्षेत्रों में मामूली अंतर से बढ़त-घटत ने मुकाबले को बेहद करीबी बना दिया है।
तिरुवनंतपुरम में NDA का उभार
राजधानी तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए सबसे ज्यादा चर्चा में है। यहां एनडीए ने सबसे अधिक वार्डों में बढ़त बनाकर एलडीएफ और यूडीएफ दोनों को चौंका दिया है। यह रुझान संकेत देता है कि शहरी क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ धीरे-धीरे मजबूत हो रही है, जो केरल की राजनीति के लिए एक नया संकेत माना जा रहा है।
2026 विधानसभा चुनाव की झलक
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय निकाय चुनावों के ये नतीजे 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले जनता के मूड का संकेत दे रहे हैं। इतिहास गवाह रहा है कि स्थानीय चुनावों में सत्ताधारी गठबंधन को झटका मिलने पर अगले विधानसभा चुनावों में सत्ता परिवर्तन की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में यूडीएफ की यह बढ़त और एनडीए की शहरी मौजूदगी आने वाले समय में राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकती है।