महाराष्ट्र के पुणे में चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में अब पीड़ित परिवार ने न्याय की लड़ाई को नई दिशा दी है। घटना के करीब एक महीने बाद केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भावुक ई-मेल भेजकर मामले में जल्द सुनवाई की मांग की है। उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस स्थानांतरित करने की अपील करते हुए कहा कि उनके बेटे को केवल एक केस फाइल बनाकर न छोड़ दिया जाए, बल्कि दोषियों को शीघ्र सजा मिले।
राष्ट्रपति को लिखी भावुक अपील
केतन अग्रवाल के पिता विशाल अग्रवाल ने राष्ट्रपति को भेजे अपने ई-मेल में खुद को किसी प्रभावशाली व्यक्ति या व्यवसायी के रूप में नहीं, बल्कि न्याय की उम्मीद लगाए बैठे एक टूटे हुए पिता के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने लिखा कि उनका उद्देश्य किसी विशेष सुविधा या रियायत की मांग करना नहीं है, बल्कि केवल अपने बेटे के लिए निष्पक्ष और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित कराना है।
पत्र में बयां किया परिवार का दर्द
अपने पत्र में विशाल अग्रवाल ने बताया कि 18 जून को उनके बेटे केतन की हत्या कर उसे लगभग 400 फीट गहरी खाई में धकेल दिया गया। इस घटना का सदमा परिवार के लिए इतना गहरा था कि महज 20 दिन बाद उनके पिता का भी निधन हो गया। उन्होंने लिखा कि उनके पिता अपने पोते से बेहद स्नेह करते थे और इस दुख ने पूरे परिवार को भीतर तक तोड़ दिया।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग
पीड़ित पिता ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाए। उनका कहना है कि उन्हें किसी तरह की वीआईपी सुविधा नहीं चाहिए, बल्कि केवल यह सुनिश्चित किया जाए कि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो और दोषियों को जल्द कानून के अनुसार सजा मिले।
न्याय की उम्मीद में परिवार
परिवार का मानना है कि समय पर न्याय मिलने से न केवल पीड़ित परिवार को राहत मिलेगी, बल्कि समाज में भी यह संदेश जाएगा कि गंभीर अपराधों के मामलों में न्याय प्रक्रिया तेज और प्रभावी हो सकती है। फिलहाल परिजन पूरे मामले में न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए जल्द कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।
अब नजर आगे की कार्रवाई पर
राष्ट्रपति को भेजे गए इस भावुक ई-मेल के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब देखना होगा कि पीड़ित परिवार की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल परिवार की सबसे बड़ी अपेक्षा यही है कि मामले का शीघ्र निपटारा हो और दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिले।