नवरात्रि के पावन दिनों में पूरे देश में देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है, लेकिन हिमालय की गोद में बसा खैट पर्वत अपने आप में अनोखा है। इसे परियों की धरती भी कहा जाता है, जहां मां भराड़ी का प्राचीन मंदिर आस्था और रहस्य का केंद्र है। घने जंगलों और पहाड़ी रास्तों से घिरा यह स्थान न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यहां घटने वाली अलौकिक घटनाएं इसे और भी रोचक बना देती हैं।
खैट पर्वत का अद्भुत स्थान
खैट पर्वत की ऊंचाई पर स्थित मां भराड़ी मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को घुमावदार पहाड़ी रास्तों और घने जंगलों से होकर गुजरना पड़ता है। चारों ओर फैली हरियाली, प्राकृतिक शांति और रहस्यमयी वातावरण इस यात्रा को एक आध्यात्मिक अनुभव में बदल देते हैं। माना जाता है कि यहां की वादियां रात के समय किसी अदृश्य शक्ति की उपस्थिति का एहसास कराती हैं।
मां भराड़ी की पौराणिक कथा
स्थानीय मान्यता के अनुसार, मां भराड़ी को मां दुर्गा का अवतार माना जाता है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में जब असुरों का आतंक फैला था, तब माता ने भराड़ी रूप धारण कर उनका संहार किया। तभी से यह स्थान शक्ति पीठ के रूप में प्रसिद्ध हो गया। भक्तों का विश्वास है कि यहां मां स्वयं प्रकट हुई थीं और आज भी अपने बच्चों की रक्षा करती हैं।
परियों की धरती का रहस्य
खैट पर्वत को परियों की धरती इसलिए कहा जाता है क्योंकि कई श्रद्धालुओं ने यहां परियों जैसी दिव्य आभा देखने का दावा किया है। मान्यता है कि ये परियां मां भराड़ी की सेविका हैं और भक्तों की प्रार्थना माता तक पहुँचाती हैं। रात के समय मंदिर परिसर में दिव्य रोशनी और अनोखी ध्वनियां सुनाई देने की घटनाएं यहां के रहस्य को और गहरा कर देती हैं।
नवरात्रि का पर्व और भक्तों की आस्था
नवरात्रि के नौ दिनों तक मंदिर परिसर में विशेष सजावट होती है। हर दिन माता की आरती, भजन-कीर्तन और दीप सज्जा से पूरा पर्वत भक्ति में डूब जाता है। आसपास के गांवों से हजारों भक्त यहां पहुंचते हैं और मानते हैं कि मां भराड़ी हर सच्चे मन की मनोकामना पूरी करती हैं।
यहां की अलौकिक कथाएं और परियों से जुड़ी मान्यताएं खैट पर्वत को केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी शक्ति केंद्र बनाती हैं।