मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में एक किसान के आत्महत्या करने की दर्दनाक घटना सामने आई है। हापला गांव के 36 वर्षीय किसान अखिलेश सोलंकी ने खेत में पेड़ से फांसी लगाकर जान दे दी। परिजन इसे बढ़ते कर्ज़ और खराब होती फसलों का नतीजा बता रहे हैं, जबकि प्रशासनिक जांच में पारिवारिक कलह मुख्य कारण के रूप में सामने आ रहा है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
खेत में पेड़ से लटका मिला किसान का शव
हापला गांव के किसान अखिलेश सोलंकी का शव शनिवार सुबह खेत की मेढ़ पर लगे पेड़ से लटका मिला। घटना की जानकारी मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजन रोते-बिलखते मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है।
परिजनों का दावा—कर्ज़ और फसल नुकसान से टूट चुका था किसान
परिजनों के अनुसार अखिलेश पिछले दो-तीन वर्षों से लगातार आर्थिक संकट से जूझ रहा था। सोयाबीन की फसल पूरी तरह खराब हो गई थी, जबकि मक्का और अरवी के दाम न मिलने से स्थिति और बिगड़ गई। उसके ऊपर करीब 3 लाख रुपये का सोसायटी व बैंक का कर्ज था, साथ ही साहूकारों से भी उधार लिया था।
परिवार के पास 8 एकड़ जमीन, पर बढ़ता नुकसान बना बोझ
अखिलेश और उसके भाई के पास कुल 8 एकड़ जमीन है। दोनों के हिस्से में 4-4 एकड़ खेती है। परिजन बताते हैं कि लगातार होती फसल घाटे और गिरते बाजार भाव के कारण अखिलेश कर्ज़ की जाल से निकल नहीं पा रहा था। आर्थिक तंगी ने उसके मानसिक तनाव को बढ़ा दिया था।
प्रशासन का दावा—किसी ने नहीं किया परेशान, पारिवारिक कलह मुख्य कारण
अपर कलेक्टर के आर बड़ोले के अनुसार प्रारंभिक जांच में पाया गया कि किसान पति-पत्नी के संबंध ठीक नहीं थे और परिवार में कलह चल रही थी। कर्ज़ को लेकर किसी भी संस्था या व्यक्ति द्वारा दबाव डालने या नोटिस भेजने जैसी बात सामने नहीं आई है।
पुलिस जांच जारी, मौत की असली वजह तलाशने की कोशिश
पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है और परिवार, गांव के लोगों तथा संबंधित संस्थानों से पूछताछ की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद ही आत्महत्या की वास्तविक वजह साफ हो सकेगी। वहीं गांव के लोग फसल नुकसान और दाम न मिलने को किसानों की बड़ी समस्या मान रहे हैं।