मध्य प्रदेश के Khandwa जिले में होली से लेकर रंग पंचमी तक एक अनोखा मेला लगता है, जिसे स्थानीय लोग ‘भूतों का मेला’ कहते हैं। Sailani Baba Dargah पर लगने वाले इस मेले में देशभर से लोग पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां बुरी आत्माओं और प्रेत बाधा से पीड़ित लोगों को राहत मिलती है और दरगाह पर विशेष अनुष्ठानों के जरिए उन्हें मुक्ति दिलाई जाती है।
सैलानी बाबा की दरगाह पर अनोखी आस्था
खंडवा से करीब 25 किलोमीटर दूर जावर गांव के पास स्थित Sailani Baba Dargah में हर साल होली के बाद से रंग पंचमी तक विशेष मेला लगता है। इस दौरान देश के अलग-अलग राज्यों से हजारों लोग यहां पहुंचते हैं। लोगों का विश्वास है कि यहां आने से प्रेत बाधा और नकारात्मक शक्तियों से छुटकारा मिलता है। यही वजह है कि इस मेले को स्थानीय तौर पर ‘भूतों का मेला’ कहा जाता है।
प्रेत बाधा से पीड़ित लोग पहुंचते हैं दरगाह
मेले के दौरान कई लोग ऐसे भी दिखाई देते हैं जिन्हें उनके परिजन जंजीरों में बांधकर या संभालकर दरगाह तक लाते हैं। मान्यता है कि दरगाह की चारदीवारी के भीतर प्रवेश करते ही बाहरी शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं और पीड़ित व्यक्ति अजीब हरकतें करने लगता है। यहां मौजूद लोग इसे बुरी आत्माओं का प्रभाव मानते हैं और दरगाह पर विशेष प्रार्थना व अनुष्ठान कराए जाते हैं।
मुर्गे और बकरे की चढ़ाई जाती है बलि
यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने की उम्मीद में मुर्गे और बकरे की बलि भी चढ़ाते हैं। कई लोग अपने साथ जानवर लाकर बाबा के नाम पर दरगाह परिसर में छोड़ देते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार लगातार पांच गुरुवार यहां आने से प्रेत बाधा से पीड़ित व्यक्ति को राहत मिलती है। इसी आस्था के चलते लोग कई दिनों तक यहां डेरा डालकर रहते हैं।
1939 में स्थापित हुई दरगाह
बताया जाता है कि Makdoom Shah Sailani से जुड़ी यह दरगाह वर्ष 1939 में स्थापित हुई थी। यह स्थल आस्था के साथ-साथ सांप्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल भी माना जाता है, क्योंकि यहां सभी धर्मों के लोग पहुंचते हैं। होली से रंग पंचमी तक लगने वाला यह मेला वर्षों से लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है, जहां लोग अपनी परेशानियों से मुक्ति की उम्मीद लेकर आते हैं।