Kharmas 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार खरमास एक विशेष अवधि मानी जाती है, जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं। इस समय को धार्मिक दृष्टि से संयम और साधना का काल माना जाता है। खरमास लगते ही विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों पर अस्थायी रोक लग जाती है। हर साल की तरह 2025 में भी खरमास को लेकर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि यह कब शुरू होगा और इसके बाद विवाह के शुभ मुहूर्त कब से उपलब्ध होंगे।
खरमास 2025 कब से होगा शुरू और कब होगा समाप्त
पंचांग के अनुसार जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं, तब मार्गशीर्ष खरमास प्रारंभ होता है। 2025 में सूर्य का धनु राशि में प्रवेश मध्य दिसंबर में होगा, जिसके साथ ही खरमास की शुरुआत मानी जाएगी। यह अवधि लगभग एक माह तक रहती है और सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही समाप्त हो जाती है। मकर संक्रांति के साथ खरमास खत्म माना जाता है।
खरमास में क्यों नहीं होते मांगलिक कार्य
धार्मिक मान्यता के अनुसार खरमास के दौरान सूर्य की गति मंद हो जाती है, जिससे शुभ कार्यों के लिए यह समय अनुकूल नहीं माना जाता। शास्त्रों में इस अवधि को देवताओं के विश्राम काल से भी जोड़ा गया है। इसलिए विवाह, यज्ञ, उपनयन और गृह प्रवेश जैसे संस्कार इस दौरान वर्जित माने गए हैं। हालांकि जप, तप, दान और व्रत के लिए यह समय अत्यंत शुभ होता है।
विवाह के शुभ मुहूर्त कब से होंगे शुरू
खरमास समाप्त होते ही विवाह के शुभ मुहूर्त पुनः शुरू हो जाते हैं। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के बाद मांगलिक कार्यों पर लगी रोक हट जाती है। इसके बाद माघ और फाल्गुन माह में अनेक शुभ विवाह मुहूर्त प्राप्त होते हैं, जिनमें लोग विवाह और अन्य संस्कार संपन्न करते हैं। यही कारण है कि मकर संक्रांति के बाद विवाहों की संख्या में तेजी देखने को मिलती है।
खरमास का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व
खरमास को संयम, साधना और पुण्य अर्जन का काल माना गया है। इस दौरान भगवान विष्णु, सूर्य देव और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस समय किए गए जप और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए भले ही मांगलिक कार्यों पर रोक हो, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से यह समय अत्यंत फलदायी माना जाता है।