हिंदू पंचांग के अनुसार खरमास को मांगलिक कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है, इसलिए इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों पर विराम लगा रहता है। अब 14 अप्रैल 2026 से खरमास समाप्त हो रहा है, जिसके साथ ही एक बार फिर शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी। इसके बाद आने वाली अक्षय तृतीया का दिन भी बेहद खास रहेगा, जिसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दौरान बिना किसी विशेष मुहूर्त के भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
खरमास समाप्त होने का महत्व
खरमास के खत्म होते ही सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है। इस अवधि के दौरान सूर्य के विशेष राशि में रहने के कारण शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है। 14 अप्रैल के बाद ग्रहों की स्थिति अनुकूल हो जाती है, जिससे विवाह, सगाई, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों के लिए रास्ते खुल जाते हैं।
अक्षय तृतीया का विशेष महत्व
19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाएगा, जिसे अत्यंत शुभ दिन माना जाता है। इस दिन को ‘अबूझ मुहूर्त’ कहा जाता है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। मान्यता है कि इस दिन किए गए कार्यों का फल अक्षय यानी कभी समाप्त न होने वाला होता है। खासतौर पर विवाह और निवेश के लिए यह दिन बेहद शुभ माना जाता है।
शुभ तिथियों में बढ़ेगा आयोजन का उत्साह
खरमास के बाद पूरे वर्ष में कई शुभ तिथियां आएंगी, जिनमें विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों का आयोजन किया जाएगा। अप्रैल से लेकर साल के अंत तक अलग-अलग महीनों में शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। ऐसे में लोग अपने पारिवारिक कार्यक्रमों की योजना बनाकर इन तिथियों का लाभ उठा सकते हैं।
शुभ कार्यों में रखें इन बातों का ध्यान
हालांकि शुभ तिथियां महत्वपूर्ण होती हैं, लेकिन किसी भी कार्य को करने से पहले पंचांग और ज्योतिषीय सलाह लेना बेहतर माना जाता है। सही समय और विधि से किए गए कार्य अधिक फलदायी होते हैं। साथ ही, व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार मुहूर्त तय करना भी लाभकारी रहता है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।