Khelo India Dialogue : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खेलो इंडिया डायलॉग कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि खेल सिर्फ पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि बेहतर समाज और बेहतर नागरिक बनाने की ताकत भी रखते हैं। उन्होंने कहा कि खेल की भावना जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिलाने में मदद करती है। पीएम ने युवाओं से खेलों में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने की अपील की और कहा कि देश के विकास में खेलों की बड़ी भूमिका है।
हर जिले में छिपी है प्रतिभा
पीएम मोदी ने कहा कि देश के सैकड़ों जिलों में ऐसे युवा मौजूद हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकते हैं। जरूरत सिर्फ उनकी प्रतिभा को पहचानने और सही दिशा देने की है। उन्होंने कहा कि भारत के हर जिले में खेल प्रतिभाओं का बड़ा भंडार है और सरकार उन्हें आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। उनका मानना है कि सही अवसर मिलने पर युवा दुनिया में भारत का नाम रोशन कर सकते हैं।
ओलंपिक खेलों को लेकर चिंता
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ओलंपिक खेलों में भारत की भागीदारी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई ऐसे खेल हैं, जिनमें भारत की मौजूदगी अभी भी सीमित है। पीएम ने बताया कि 2012 ओलंपिक में भारत कई स्पर्धाओं में हिस्सा ही नहीं ले पाया था। उनका कहना था कि देश को उन खेलों पर भी ध्यान देना होगा, जहां अभी भारत की मजबूत उपस्थिति नहीं है।
नए खेलों में बढ़ानी होगी भागीदारी
पीएम मोदी ने कहा कि भारत के पास लंबी समुद्री तटरेखा, पहाड़ी क्षेत्र और विविध भौगोलिक परिस्थितियां हैं। इसके बावजूद सर्फिंग, स्पोर्ट क्लाइंबिंग, विंटर स्पोर्ट्स और कई अन्य खेलों में देश की भागीदारी अपेक्षा से कम है। उन्होंने कहा कि इन खेलों के लिए बेहतर व्यवस्था और प्रशिक्षण तंत्र विकसित करने की जरूरत है, ताकि आने वाले समय में भारतीय खिलाड़ी इन क्षेत्रों में भी सफलता हासिल कर सकें।
बच्चों के लिए टैलेंट हंट की तैयारी
प्रधानमंत्री ने 5 से 15 वर्ष तक के बच्चों की प्रतिभा पहचानने के लिए बड़े स्तर पर टैलेंट हंट अभियान चलाने की बात कही। उन्होंने कहा कि सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि बच्चा किस खेल में रुचि रखता है, बल्कि यह भी समझना जरूरी है कि वह किस खेल के लिए सबसे अधिक उपयुक्त है। इसके आधार पर उसे प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
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खेल सिखाता है संघर्ष और वापसी
अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने कहा कि खेल केवल चैंपियन बनना नहीं सिखाते, बल्कि जीवन की चुनौतियों से लड़ना भी सिखाते हैं। उन्होंने कहा कि खेल इंसान को गिरकर दोबारा उठने का साहस देते हैं। यही भावना जीवन में आगे बढ़ने की सबसे बड़ी ताकत बनती है। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि भारत आधुनिक खेल इकोसिस्टम तैयार कर रहा है और आने वाले वर्षों में देश खेलों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएगा।