भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव ने जब राजनीति में एंट्री ली थी, तो माना जा रहा था कि वह मनोज तिवारी और रवि किशन की तरह बड़ा असर दिखाएंगे। लेकिन सबसे बड़ी भूल उन्होंने तब कर दी, जब चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने सीधे-सीधे यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा। खेसारी ने कहा था कि यूपी में जंगलराज है, बुलडोज़र से लोकतंत्र कुचला जा रहा है। यह बयान उनके लिए भारी साबित हुआ। राजनीतिक जानकार साफ कह रहे हैं कि अगर खेसारी योगी से पंगा ना लेते, तो शायद उनका चुनावी सफर कुछ और होता। बिहार में जिस सीट पर खेसारी उतरे थे, वहां योगी ने न सिर्फ माहौल बदला बल्कि दिखा दिया कि बिहार की राजनीति में भी उनका प्रभाव कितना बड़ा है।
योगी ने हिलाया विपक्ष का 'कॉन्फिडेंस' !
बिहार चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने 31 रैलियां कीं और इनमें से 28 सीटों पर एनडीए ने जीत हासिल की। यानी लगभग 90% स्ट्राइक रेट, जो किसी भी स्टार कैंपेनर के लिए रिकॉर्ड से कम नहीं। चौंकाने वाली बात यह है कि खेसारी की सीट भी इसी लहर में उड़ गई। योगी जिस क्षेत्र में गए, वहां पूरा माहौल बदल गया और आरजेडी की उम्मीदें धरी की धरी रह गईं। यही कारण है कि खेसारी की हार सिर्फ हार नहीं, बल्कि एक राजनीतिक सबक बन गई कि स्टारडम मैदान जीत सकता है, लेकिन योगी का प्रभाव पूरी खेल पलट सकता है
हार के बाद खेसारी का पलटा सुर
चुनाव खत्म होते ही खेसारी लाल का लहजा पूरी तरह बदल गया. लाइव आए तो आवाज भर्रा गई और कहा मैंने गलत बोला... योगी आदित्यनाथ मेरे गार्जियन हैं. जो कल तक योगी पर बरस रहे थे, आज उन्हीं की तारीफों के पुल बांध रहे हैं. वजह साफ है 80% भोजपुरी फिल्मों की शूटिंग यूपी में होती है, परमिशन, लोकेशन, सिक्योरिटी सब योगी सरकार के हाथ में है. इंडस्ट्री के लोगों ने पहले ही उन्हें चेताया था योगी से पंगा मत लेना, करियर खतरे में पड़ जाएगा हार के बाद खेसारी को ये बात सच लगने लगी और उन्होंने तुरंत ‘राइट टाइम’ होकर सुर बदल लिए.
राजनीति का सबक
खेसारी ने स्टार पावर और जातीय समीकरण पर भरोसा किया, जबकि यादव वोट तेजस्वी के साथ खड़े रहे और बाकी काम योगी की लहर ने कर दिया. हार के बाद खेसारी अब पूरी तरह डिफेंसिव मोड में हैं. सोशल मीडिया पर लोग मजाक उड़ा रहे हैं जब वोट चाहिए था तब हमला… जब करियर बचाना है तो तारीफें. लेकिन एक बात साफ है खेसारी ने समझ लिया कि राजनीति का ताल अलग है और सत्ता की चाल अलग. अब देखना यह है कि खेसारी फिल्मों पर फोकस करते हैं या राजनीतिक मोर्चा फिर खोलते हैं. फिलहाल तो वो योगी की कृपा पाने में ही जुट गए हैं.