Khurram Parvez Granted Bail: दिल्ली हाई कोर्ट ने कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज को यूएपीए से जुड़े एक मामले में जमानत दे दी है। यह फैसला लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया के बाद आया है। परवेज को वर्ष 2021 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गिरफ्तार किया था। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद कुछ शर्तों के साथ उन्हें राहत प्रदान की है।
हाई कोर्ट में मिली राहत
खुर्रम परवेज ने निचली अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने मामले से जुड़े दस्तावेजों और पक्षकारों की दलीलों पर विचार करने के बाद उन्हें जमानत देने का फैसला सुनाया। अदालत ने जमानत के साथ कुछ निर्धारित शर्तों का पालन करने का निर्देश भी दिया है।
एनआईए ने लगाए थे गंभीर आरोप
जांच एजेंसी का आरोप था कि परवेज कथित तौर पर आतंकवाद से जुड़े नेटवर्क और गतिविधियों का समर्थन करने वाली साजिश का हिस्सा थे। एजेंसी ने दावा किया था कि मामले में टेरर फंडिंग, भर्ती और अन्य गतिविधियों से संबंधित पहलुओं की जांच की गई है। इन्हीं आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
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परवेज ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर, खुर्रम परवेज ने अपने खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को खारिज किया। उनका कहना रहा कि वे लंबे समय से मानवाधिकार और सामाजिक मुद्दों पर काम कर रहे हैं तथा उनका किसी प्रतिबंधित संगठन से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने अदालत में यह भी दलील दी कि जांच एजेंसियां उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को पुष्ट करने वाले पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकीं।
मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जमानत मिलने का अर्थ मामले का समाप्त होना नहीं है। अदालत में इस प्रकरण की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी और अंतिम फैसला साक्ष्यों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा। फिलहाल हाई कोर्ट के इस आदेश को मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम माना जा रहा है।